मंजिल
(लय : एक दिन बिक जायेगा माटी के मोल)
निकलेगे इक दिन तो, तन से ये प्राणपीछे रह जायेगे मिट्टी के मकान
मोटर विमान ट्रेन आयेगे ना काम परिजन ले जायेगे अर्थी को श्मशान ॥
मनमानी नादानी चाहे कर ले जीवन के धट को विष से चाहे भर ले ये साथी ये भाई, ये रुपये ये पाई इनसे मुहब्बत करके, मनचाही करले परस्पर रिश्ते ये जलते है सबको छलते है इनसे ऊपर उठकर पायेगा वरदान ॥
चंचल है बिजली ज्यो ये जिंदगाणी आया था चल दिया बस खतम कहानी टिमटिमते ये तारे, कही सुमन अंगारे जीवन का महल सजाले, सुन संतो की वाणी घरा पर खुशिया लुटायेजा, गम छिपायेजा सासो की सरगम से निकले मीठी तान ॥
कांटो में फुलो मे तु मुसकाना
जीवन के पथ मे राही रुक ना जाना
तुफानी बरसाते अधियारी वे राते कितनी भी रोके लेकिन आगे बढ़ जाना परस्पर मजिल को पायेगा तम भगायेगा तेरे दखाजे पर आयेगे भगवान ॥