जो भी जपता पार उतरता
मनवा हो मनवा वीर प्रभु का नाम सदा सुखकारी।
जो भी जपता पार उतरता नाम सदा जयकारी ॥
जय जय वीर जय महावीर ॥
अपनी किस्मत बहुत बड़ी है वीर प्रभु को पाया। भाग्योदय से पुण्य फले हैं पाई शीतल छाया। चरणों में जो भी आया है-है, उसकी नैया तारी ॥
२. जन्मे थे तुम महलों में फिर भी वैभव ठुकराया।। मैत्री का सन्देश तुम्हारा पाकर जग हरसाया। दिव्य रोशनी तुमसे पाई-पाई, हम सब हैं आभारी ॥
३. मुक्तिधाम में आप विराजो, दर्शन कैसे पाएं। बिना तुम्हारे प्रभुवर देखो हम कितने अकुलाए। तेरे उपदेशों पर चलने, की है अब तैयारी ॥
४. जन्म जन्म में मिले तुम्हारी शरण एक अभिलाषा। चिन्मय आत्म रूप पहचानूं, अन्तर दिल है प्यासा । पल पल ध्यान धरे मन मेरा, बन जाए अविकारी ॥
(तर्ज : मांई न मांई)