श्री शिव आराधना
अमृत तो देवों को पिलाया, आप हलाहल पान किया, अक्षर ज्ञान उसी को दे दिया, जिसने तेरा ध्यान किया,
बीगा तो नारद को दे दिया, इन्द्र भवन को राज दिया, कर्म काण्ड ब्राह्मण को दे दिया, सन्यासी को त्याग दिया
रावण को सोने की लंका, बीस भुजा दस शीष दिया,
श्री राम को धनुष बाण और, हनुमान जगदीश दिया,
पाप रावण ने किया, राम की सीता को हरा,
भक्त वो तेरा था पर, फिर भी ना माफ किया,
दोनों भाई, आये लंका मांही, दोनों भाई रघुराई,
सोने की लंका जलाकर, मारा रावण को जाकर,
बम बम भोले शंकर ।।
जो तेरी सेवा करता, सागर से पार हो जाता,
“राजू” भी यही चाहता, कुछ और नहीं मांगता,
सब भक्तों की – २, मैय्या पार लगाता ।।
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