Bana Bani Geet -5

1

(तर्ज : रघुपती राघव राजा राम …)
रघुपती राघव राजा राम, एसा बन्ना दो भगवान २ रोज सुबह वो चाय बनाये, खुद पीवे और मुझे पिलावे 
और कहे पिवो पिवो मेरी जान एसा बन्ना 
रोज दोपहर को खाना बनाये, खुद खाये और मुझे खिलाये और कहे खावो – खावो मेरी जान, एसा बन्ना रोज शाम को घुमने जाये, खुद घुमे और मुझे घुमाये 
और कहे घुमो घुमो मेरी जान, एसा बन्ना 
रोज रात को पिक्चर जाये, खुद जाये और मुझे ले जाये और कहे चलो चलो मेरी जान, 
एसा बन्ना रघुपती राघव राजा… ***
2
(तर्ज : गंगा मैया मे जब तक ये पानी रहे …)
चंदा सूरज का जब तक उजाला रहे
 बन्ना बन्नी की जोड़ी सलामत रहे 
सलामत रहे बन्ना ओ प्यारे बन्ना 
बन्नी ओ प्यारी बन्नी तेरे हरीयाले बन्ने ने भेजा, तेरे शीष का टीका रंगीला
बन्नी ओ लाडली, लाड बन्ना ओ प्यारे बन्ना ओ लाडली, तेरे शीष की शोभा हमेशा रहे – हमेशा रहे बन्नी ओ प्यारी बन्नी … चन्दा सूरज का … (इसी तरह सभी गहनों का नाम लेणा) ***
3
(तर्ज : फिरकी वाली …)
कोका कोला, टमाटर आलु छोला, शहर के बाजार में, बना बनी को ले आना धुम धाम से । 
पहले भी तुने एक रोज ये कहा था,
टीका लाने का तुमने वादा किया था
टीका लाना, बनी को पहनाना, तुम अपने गोरे हाथ से … बन्ना बनी को…..
(इसी तरक सभी गहनों का नाम लेणा)
***
4
फूल खीलते ही खुश्बु निकल जाती है, शादी होते ही बन्नी बदल जाती है। ओ हो ओ हो बनी तेरा टीका कहां, तेरी रखड़ी पे मेरी नजर जाती है, फूल खीलते ही
(इसी तरह सभी गहनों का नाम लेणा) ***
5
(तर्ज : चांद सी महबूबा हो मेरी कब )
चांद सी बनी बागों में आना, झूला मैने डाला है हम तुम दोनों संग झुलेंगे ऐसा मैने सोचा है
शीष बनी के टीका सोहे, रखड़ी की अजब बहार है
 शीष बना के फेंटा सोहे, किलंगी की अजब बहार है,
 हम तुम दोनो
(इसी तरह बना बनी के गहनों का नाम लेणा)
***

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