(लय- मिलो न तुम तो)
आज विदाई लेने सतिवर, हो गए हो तैयार
उदासी छा रही है
पावस पूरा करके सानन्द ,कर रहे आप विहार
उदासी छा रही है
④ ओ प्यारे सतिवर तुमने, सींचा चमन को अमृत धार से रक्षा की सब सुमनों की, तुमने बहुत ही प्यार से
ज्ञान सुना कर। भक्ति जगाकर (2) जाने को तैयार
उदासी छा रही है
७ मिसरी सी मीठी वाणी,दिल को लुभाती हरदमआपकी सुनने को दौड़ी आती हल्की बनाने गठरी पापकी
ह्रदय लुभाकर स्नेह जगाकर -2 जाने को तैयार
उदासी छा रही है
सबको ही सतिवर पल पल,याद तुम्हारी अविरल आएगी
रचना लगाई अनुपम,भूली कभी ना जायेगी
जल्दी आकर ,विरह मिटाकर 2 लाना नयी बहार
उदासी छा रही है
भूल हुई जो हमारी, सतिवर जान या अनजान में,
माफ कराना सबकुछ, भक्तो की भक्ति रखकर ध्यान में मंगल गाये, गान सुनाएं (२) चले बसन्त बयार
उदासी छा रही है