(तर्ज- फूल तुझे भेजा है खत मे)
आज तुम्हारे जाने से पहले मुरझित सारा उपवन है
कैसे देंगे तुमको विदाई दिल ये से सबके, उनमन हैं
सूनी लगती नगरी सारी, जैसे जंगल भी गलियां
सुख रही हैं आज हमारे मानस की सारी कलियां
गुरु क्रुपा से हमें आपका पालन ये प्रवास मिला
जिन वाणी को जीवन में अपनाते ये आश्वासन मिला
कितनी खुशियां छाई उस दिन जिस दिन आप यहाँ आए आज सभी की आखें देखें, कितनी भर भर कर आएं मधुर मधुर वाणी तेरी, सबके दिल को है भाती
-कौन हमें देगा जीकारा, रह रह कर मनमै आती
भीगी पलकें गद गद स्वर से , कुछ भी हम नहीं कह पाते
आने वाले तो जायेगे, कैसे यहाँ पर रुक जाते
तेरी शिक्षा से जीवन में आगे बढ़ते जाएं
सनेह लगाकर तुम अब जाते हो, दिल सभी के दुख पाएं आज
जब जब सुनते प्रवचन धारा, मानो अमृत बरसाते नित्य ज्ञान की बातें सुनने, हम दौड़े दौड़े यहाँ आते
जो भी मुनिवर हमे बताया, याद रखेंगी क्षण क्षण में, वापस दर्शन देना जल्दी, पौरुष भरना जन जन में