यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
तर्ज (Tune): चांदी जैसा रंग है तेरा –
भजन के बोल / Lyrics
विदाई गीत
बाबुल का घर जन्म भूमि है, कर्म भूमि ससुराल
दोनो कुल की लाज लाडली, रखना आज संभाल
1. भाई की लाडो, मां की दुलारी,बाबुल का अभिमान . तेरे बिना सब सुना होगा घर आंगन और द्वार
इस चौखट से उस चौखट तक, रखना जी को संभाल
कैसै भुला पायेंगे हम तेरा वो प्यार
2 .सास ससुर मां बाप है तेरे, ननदी बहन समान १)
भाई के जैसे देवर जेठ है। देना उनको मान
सबकी दुलारी बनकर रहना, इसमे है सम्मान
तुमसे ही बाबुल की इज्जत, रखना इसका ध्यान
3. ध्यान रहे कोई बात वहाँ की, यहाँ न आने पाये
जीत ले सबके मन को ऐसे, सब तेरे बन जाये
निर्मल जल के जैसे सबके, मन में तू रम जाए
आर्शीवाद यही मेरा तू रहे सदा खुशहाल :
बाबुल का घर जन्म भूमि है कर्म भूमि ससुराल
4.जठै प्यार है बठे लडाई ए आ तो चलती आई
दुनिया तो कहती रेवे आपांने इसे काई
समझदारी सू काम करीजे आई है शिक्षा म्हारी
आर्शीवाद यही मेरा तू रहे सदा खुशहाल :
बाबुल का घर जन्म भूमि है कर्म भूमि ससुराल