(तजं: पणिहारी)1
हरियालो बन्नो घणो पुठरो ए म्हारी सैया ए लोय पणिहारी ए लोय
चांद सूरज उणीयार बन्ना सा
स्यालुड़ो ल्याज्यों सांगानेर रो ए म्हारी सैया ए लोय
पेच रे कोर लगाय बन्ना सा । हरीयालो
चुडलो तो ल्याजो हस्ती दांतरो ए म्हारी सैंया ए लोय
गोर हाथों में पेराय बन्ना सा । हरीयालो.
मेहन्दी तो ल्याजो हरीया बागरी ए म्हारी सैया ए लोय बनड़ी रा हाथ रचाय, बन्ना सा । हरीयालो
जानी तो ल्याजे अपनी जोड़ रा ए पणीहारी ए लोय जान्या री जोड़ लगाय बन्ना सा । हरीयालो
बनड़ी तो ल्याजो बड परिवार री ए पणीहारी ए लोय
नवरंग हेत लगाय बन्ना सा, जोड़ स्यू महल पधार बन्ना सा
हरियालो बन्नो घणो
चांद सूरज उणीयार बन्ना सा
***
2
(तर्ज उडे जब जब जुल्फें तेरी.
ओ बनी चांदसा मुखड़ा तेरा
ओ बना सांवली सुरतीया तेरी
ओ बनी एक झलक तेरी देखें
ओ अभी संग है सखी सहेली
ओ बनी आज मिलन तेरा मेरा
ओ बना बाजे पायलियां निगोड़ी
ओ बनी तेरा मेरा बंधन है ऐसा २, कि मन बरजोरी हरे अलबेली ॥ २,
कि देख देख मन ना भरे रंग रसीया ॥ २, कि छत ऊपर आजा बनी ए अलवेली ॥ २,
उन्हे जरा घर जाने दो रंग रसीया ॥ २,
कि महल पधारो बनी ए अलबेली ॥ २, कि जिया मेरा लाज भरे रंग रसीया ॥ २,
कि अब कोई टारे नाटरे अलबेली ॥
***
3
(तर्ज मन डोले मेरा तन……………
बनी अलबेली, फिरे अकेली, कर रही सोच विचार रे
अव कौन बजावे वांशुरीया ।
मधुर मधुर दादाजी से बोले,
सुनो दादाजी मेरी बात रे… अब कौन बजावे …
बना ढुंढवादो शादी करवादो, ऊमर बीती जाय रे
बनी अलवेली … अब कौन
अब कौन ….
(इसी तरह बावा, काका, भैया सभी नाम लेना)
4
कलमी आम
बना हस्ती लाज्यो जी, बना घुड़ला लाज्यो जी बना लाज्यो लाज्यो कलमी आम, म्हार घर आज्यो जी
बनी काँई हट लागी ए नाजू काँई हट लागी ए
म्हार नहीं छ आमा रो रुजगार – कांई हट लागी ए
बना झुठ मत बोलो जी – २
थांरा दादोजी कमाव दिन रात – झुठ मत बोलोजी
बना क्यु परणिज्या जी – २
बना परण हटायो म्हारो मान – क्युं परणिज्या जी
बनी बाबो जी परणाया ए – २
म्हार घर रो करसी, काम, यूं पराणिज्या जी (इसी तरह पापा, काका, बीरा सभी का
***