Author name: Sunita Dugar

Vasu Poojya

12.Barhve Tirthankar Bhagwan Vasupoojya Ki Kahani

12thTirthnkar Bhagwan Shree Vasupoojya Ka Symbol (Pratik)-Buffalo  भगवान् श्री वासुपूज्य तीर्थकर गोत्र का बन्ध अर्धपुष्कर द्वोप की मंगलावतो नगरी में राजा पद्मोत्तर ने इस तत्त्व को क्षणभर के लिए विस्तृत नहीं किया-संसार अनित्य है। अतुल सम्पत्ति व विपुल भोग सामग्री पाकर भी वे कभी उन्मत्त नहीं हुए। वे सदैव अध्यात्म व आत्म-विकास के बारे में […]

Vimalnath

13.Terha Ve Tirthankar Bhagwan Vimalnath Ki Kahani

13th Tirthankar Bhagwan Shree Vimalnath Ka Symbol (Pratik)-Boar  भगवान् श्री विमलनाथ तीर्थङ्कर गोत्र का बंध सर्वज्ञता प्राप्ति के लिए दीर्घकालीन प्रयत्न की आव श्यकता है। सिर्फ एक भव का प्रयत्न ही काम नहीं आता, अनेक भवों के प्रयत्नों से ही आत्मा की उज्ज्वलता सम्भव है। प्रत्येक तीर्थङ्कर ने अपने पूर्व जन्मों में विभिन्न प्रकार से

Anantnath

14.Chawd Ve Tirthankar Bhagwan Anantnath Ki Kahani

14th Tirthankar Bhagwan Shree Anantnath Ka Symbol ( Pratik)- Falcon भगवान् श्री अनन्तनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध चौदहवें तीर्थकर अनन्तनाथ अपने पूर्व जन्म में अरिष्टा नगरी के राजा पद्मरथ के रूप में भू-मण्डल में सर्वाधिक वर्चस्वी राजा थे। सब राजाओं पर इनकी धाक थी। पद्मरथ के विरुद्ध संघर्ष की बात तो दूर, विरोध में बोलने

Dharmnath

15.Pandrve Tirthankar Bhagwan Dharmanath Ki Kahani

15thTirthnkar Bhagwan Shree Dharm Nath Ka Symbol ( Pratik) -Vajra भगवान् श्री धर्मनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध धातकी खंड की पूर्व विदेह में भदिलपुर नामक समृद्ध नगरी थी। उसके पराक्रमी राजा सिंहरथ ने धर्मगुरुओं से जब सुना कि योद्धाओं को जीतना आसान है, किंतु आत्मा पर नियंत्रण पाना कठिन है, खूंखार शेर को पकड़ना आसान

Shanti Nath

16.Solhve Tirthankar Bhagwan Shantinath Ki Kahani

16thTirthnkar Bhagwan Shree Shantinath Ka Symbol ( Pratik) -Deer  भगवान् श्री शांतिनाथ तोर्थङ्कर गोत्र का बन्ध भगवान् शांतिनाथ ने तीर्थंकर गोत्र का बंध पिछले जन्म में ही कर लिया था। पूर्व जन्म में श्रीसेन, वज्रायुध, मेघरथ आदि के रूप में उन्होंने विशेष ख्याति अर्जित की थी। धार्मिक निष्ठा का विशेष परिचय दिया था। देवों ने

Kunthu Nath

17.Satarh Ve Tirthankar Bhagwan Kunthunath Ki Kahani

17ve, Tirthankar Bhagwan Shree Kunthu Nath Ka Symbol ( Pratik)- Goat भगवान् श्री कुंथुनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध पूर्व महाविदेह की खड्गी नगरी में प्रबल प्रतापी सिंहावह राजा थे। विशाल भोग सामग्री का उपभोग करते हुए अपनी प्यारी प्रजा की सुख सुविधा को जुटाने में वे सदैव संलग्न रहते थे। राजा को सन्तों का सम्पर्क

Arnath

18.Atthahar Ve Tirthankar Bhagwan Arnath Ki Kahani

18ve Tirthankar Bhagwan Shree Arnath Ka Symbol ( Pratik)- Nandavarta भगवान् श्री अरनाथ तीर्थङ्कर गोत्र का बंध भगवान् श्री अरनाथ का जीव पूर्व-विदेह क्षेत्र की सुसीमा नगरी के नरेश धनपति के रूप में था। उस भव में उन्होंने विशेष धर्म की साधना की। राज्य भी किया, किन्तु सहज बन कर। लोगों को इतना नीति-निष्ठ बनाया

Munisuvrath

20.Bees Ve Tirthankar Bhagwan Munisuvrath Ki Kahani

20veTirthankar Bhagwan ShreeMuni Suvart Ka Symbol(Pratik) -Tortoise भगवान् श्री मुनिसुव्रत तीर्थंकर गोत्र का बंध भगवान् मुनिसुव्रत के जीव ने पश्चिम-महाविदेह में चम्पा नरेश सुरश्रेष्ठ के जन्म में उत्कृष्ठ कोटि की साधना की थी। प्राप्त सत्ता को ठुकरा कर आपने मुनि-व्रत को ग्रहण किया । विभिन्न अनुष्ठानों से आर्हत्-धर्म की प्रभावना की। महान् कर्म-निर्जरा कर उन्होंने

ArishtNemi

22.Bais Ve Tirthankar Bhagwan Arishtnemi Ki Kahani

22ve Tirthankar Bhagwan Shree ARISHTNEMI ka Symbol (Pratik)-Conch,(Shankh) भगवान् श्री अरिष्टनेमि को आज के इतिहासकार भी महापुरुष के रूप में स्वीकार करते हैं। 24 तीर्थंकरों मे इक्कीस को प्रागेतिहासिक काल के मानते हैं। किन्तु, बाइसवे तीर्थंकर श्री अरिष्टनेमी की ऐतिहासिकता के बारे में सब एकमत है। उनके तीर्थङ्कर गोत्र का बन्ध ,शंख राजा के भव

Paras Nath

23,Tevis Ve Tirthankar Bhagwan Parshvnath Ki Kahani

23 veTirthnkar Shree Parshvnath Ka Symbol (प्रतीक-)Snake भगवान् श्री पार्श्वनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध पूर्व महाविदेह में राजा कुलिसबाहु की धर्मपत्नी सुदर्शना को एकदा रात्रि में चौदह स्वप्न आये। महारानी जागृत होते ही रोमांचित हो उठी। राजा को जगाकर उसने सारा घटना-क्रम बतलाया। हर्ष विभोर राजा ने कहा-रानी, हमें तो प्रतीक्षा केवल एक पुत्र की

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