Author name: Sunita Dugar

Ajit Nath

2.Second (Dusre)Tirthankar Bhagwan Shree Ajit Nath Ki Kahani

2ndTirthankar Bhagwan Shree Ajit Nath Ka Symbol ( Pratik)-Elephant  दूसरे तीर्थंकर भगवान अजित नाथ  जैन दर्शन का विश्वास आत्मवाद में है ,आत्मा अपनी सत क्रिया से कम कर्म मुक्त होकर परमात्मा बनती है. जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजीत नाथ है, अजीत नाथ ने भी अपने पूर्व जन्म में घोर तपस्या की थी ,सम्राट […]

Sanbhav Nath

3,Third (Tisare)Tirthankar Bhagwan Shree Sambhav Nath Ki Kahani

3rd Tirthankar Bhagwan Shree Sanbhavnath Ka Symbol ( Pratik)-horse भगवान् श्री संभवनाथ महापुरुष कोई एक दिन में नहीं बन जाता । इसके लिए वर्षों नहीं, कई जन्मों तक साधना करनी पड़ती है। भगवान् श्री संभवनाथ के जीव ने भी अनेक भवों में साधना की थी, मान-वीय गुणों का विकास किया था, उसी के परिणामस्वरुप वे

Abhinanandn

4.Forth(chothe) Tirthankar Bhagwan Shree Abhinanandn Ki Kahani

4rth Tirthankar Bhagwan Shree Abhinanandn Ka Symbol (Pratik)(Monkey) भगवान् श्री अभिनन्दन तीर्थंकर गोत्र का बंध महाबल के भव में भगवान् अभिनन्दन का जीव भौतिकता के प्रति सर्वथा उदासीन रहता था। राज्य सत्ता व युवावस्था का जोश भी उन्हें उन्मत्त नहीं बना सका। पिताजी का सौंपा हुआ दायित्व वे निर्लिप्त-भाव से निभाते थे तो संयम के

Sumati Nath

5 Fifth Tirthankar Bhagwan Shree Sumati Nath

4thTirthnkar Bhagwan Shree Sumati Nath Ka Symbol ( Pratik)-Curlew भगवान् श्री सुमतिनाथ तीर्थंकर गोत्र का बंध  तीर्थकर सुमतिनाथ का जीव पूर्व-जन्म में पूर्वमहाविदेह श्री पुष्कलावती विजय में सम्राट् विजयसेन के महल में चिर अभिलाषित पुत्र के रूप में पैदा हुआ था। इनसे पहले सम्राट् के घर कोई संतान नहीं होने में महारानी सुदर्शना अत्यधिक चिंतित

Padamprabhu

6. Chhat Ve Tirthankar Bhagwan Shree Padam Prabhu Ki Kahani

6th Tirthankar Bhagwan Shree Padam Prabhu Ka Symbol (Pratik)-Red Lotus  भगवान् श्री पद्मप्रभ तीर्थकर का गोत्र बन्ध सम्राट् अपराजित सम्राट् का पद पाकर भी संत-हृदय थे। वासना उन पर कभी हावी नहीं हुई, वे ही सदा वासना पर हावी रहे। राज्य के बड़े-बूढ़े लोग प्रायः यही कहते थे कि हमारे सम्राट् में भोगों की दृष्टि

Suparshavnath

7.SatveTirthankar Bhagwan Shree Suparshavnath

7th Tirthankar Bhagwan Shree Suparshavnath Ka Symbol (Pratik) (Swastika) भगवान् श्री सुपार्श्वनाथ तीर्थकर गोत्र का बन्ध क्षेत्रपुरी नगरी के राजा नन्दीसेन पूर्व जन्मों की साधना से बहुत ही अल्पकर्मी थे। विपुल भोग सामग्री पाकर भी वे अन्तर में अनासक्त थे। सत्ता के उपयोग में उनका मन कभी लगा नहीं। वे सत्ता से विलय होने के

Chandra Prabhu

8.Aath Ve Tirthankar Bhagwan Shri Chandra Prabhu Ki Kahani

8th Tirthankar Bhagwan Shree Chanda Prabhu Ka Symbol (Pratik) -Crescent Moon) भगवान् श्री चंद्रप्रभ प्रभु तीर्थकर गोत्र का बंध अनेक जन्मों की सत्क्रिया के फलस्वरूप धातकी खंड की मंगलावती नगरी के राजा पद्म के भव में धर्म-प्रेरणा का अच्छा योग मिला था। शहर में साधुओं का आना जाना प्रायः रहता था। धर्म की प्रेरणा सामान्यतः

Suvidhi Nath

9.Navame Tirthankar Bhagwan Suvidinathji Ki Kahani

9thTirthankar Bhagwan Shree Suvidinathji Ka Symbol (Pratik )-Crocodile) भगवान सुविधिनाथ तीर्थंकर गोत्र का बंध पुष्कलावती विजय के सम्राट् महापद्म राजा होते हुए भी सात्विक प्रकृति वाले थे। सत्ता पाकर भी वे अहंकार से अछूते रहे। राजकीय वैभव और राज-रानियों के संयोग में रहकर भी वे वासना-सिक्त नहीं थे। अवसर पाकर राजा ने पुत्र को राज्य

Sheetalnath

10.Dasve Tirthankar Bhagwan Sheetalnath Ki Kahani

10th Tirthankar Bhagwan Shree Sheetal Nath Ka Symbol (Pratik) -Shrivatsa भगवान् श्री शीतलनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध सुसीमा नगरी के राजा पद्मोत्तर मानवीय गुणों में परिपूर्ण थे। उन्होंने अपने राज्य में ऐसी व्यवस्था की कि राज्य में सब व्यक्ति आत्म-सम्मान के साथ जीवनयापन कर सकें । उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति परमुखापेक्षी नहीं था

Shreyans Nath

11.Gyarve Tirthankar Bhagwan Shreyansh Nath Ki Kahani

11th Tirthankar Bhagwan Shree Shreyansh Nath Ka Symbol ( Pratik)- Rhinoceros भगवान् श्री श्रेयांसनाथ तीर्थङ्कर गोत्र का बंध अर्ध-पुष्कर द्वीप में राजा नलिनगुल्म राज्य वैभव को पाकर भी बेचैन रहते थे। सब कुछ पाकर भी उन्हें रिक्तता महसूस होती थी। आज हैं, कल क्या होगा ? यह चिन्ता उन्हें सदैव सताती रहती थी। जीवन में

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