Author name: Sunita Dugar

Jain Bhajan

Lelyo Shanti Prabhu Ro Nam

लेल्यो शान्ति प्रभु रो नाम लेल्यो शान्ति प्रभु रो नाम, जिनवर शांति-२ रो धाम । धोल्यो दिल रा पाप तमाम, बेगी मुक्ति मिलसी, हो बेगी.. ॥ ध्रुव ॥ १. नहीं है जीवन रो विश्वास, अचानक रुक जावे लो सांस । पूरी हुई न किणरी आश, मन की मन में रहसी, हो मन की.. ।। २. […]

Jain Bhajan

Jin Shasan Tej Badhaiya Re

जिन शासन तेज बढ़ाया रे (लय : कैसी वह कोमल काया रे…) जिन-शासन तेज बढ़ाया रे, तीर्थंकर भगवान, हे कल्पवृक्ष की छाया रे, तीर्थंकर भगवान,  कितनों को पार लगाया रे, तीर्थंकर भगवान। अर्हत् है महिमा शाली, प्रवचन की छटा निराली, द्वादश गुण रूप कहाया रे, तीर्थंकर भगवान । है सिद्ध मुक्त अविकारी, शुभ आठ गुणों

Jain Bhajan

Tirthankar Chobis

तीर्थंकर चौबीस लय : चांद चढ्यो गिगनार तीर्थंकर चौबीस नित उठ ध्यान धरूं जी, ध्यान धरूं । मंगलमय जगदीश, महिमा गान करूं जी, गान करूं ॥ १. रिषभ, अजित भगवान संभव सुखकारी जी, सुखकारी। अभिनंदन जग त्राण, सुमति जयकारी जी, जयकारी ॥ २. पद्म सुपारसनाथ, चंदन चंद्रप्रभु जी, चंद्र प्रभु। सुविधि, शीतल, श्रेयांस, वंदन वासुप्रभु

Jain Bhajan

Prath Uth Parmeshthi Vandan

प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन करूं (लय : कितना बदल गया संसार ) प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन, करूं सदा निष्काम। शांति रहेगी आठों याम। १. ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन, सुमति, पद्मप्रभु पाप निकंदन, नाथ सुपार्श्व, चंद्रप्रभु, सुविधि, शीतलप्रभु से चाहूं सिद्धि, समरूं नित श्रेयांसदेव अरु वासुपूज्य अभिराम। २. विमल, अनंत, धर्म सुखकारी, शांति, कुंथु, अरि अरसंहारी,

Jain Bhajan

Simandhar Bhagwan

सीमंधर भगवान जी मैं चरणां शीश नमाऊ जी मैं दर्शण किण विध पाऊं। जी म्हारी वीनतड़ी अवधारो, जी मोहे तारो पार उतारो। जी संसार लगै छै खारो, जो वैराग्य लगै छै प्यारो। जी म्हारा आवागमन निवारो, जी सीमंधर भगवान ।। १. सीमंधर प्रभु नै प्रणमुं, चरणां शीश नमाय, आप तणां गुण मुख स्यूं गायों म्हारा

Jain Bhajan

Om Mangalam

मंगल वाणी ओम मंगलं ओंकार मंगलं आदि मंगलं आदिनाथ मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं शांति मंगल शांतिनाथ मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं वीर मंगलं महावीर मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगल नमो मंगलं सिद्धिनाम मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं साधु मंगलं साधुनाम मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगल धर्म मंगलं धर्मनाम मंगलं ओम मंगलं ओंकार मंगलं गुरु

Jain Bhajan

Pyari Pyari Lage Navkar

-: प्यारो प्यारो लागे नवकार :- (लय : नखरालो देवरीयो..) प्यारो प्यारो लागै नवकार, हिवड़े में म्हारै बसग्यो – २ म्हारै बसग्यो – रे भाया म्हारै बसग्यो – २  अमृत सो,  लागै नवकार, हिवड़े में म्हारै बसग्यो ॥ ध्रुव ॥ मंत्र घणो उपकारी ओ है, गुण रो एक खजानो – २ दोरी बैला आडो आवै,

Jain Bhajan

Namo Arhantam Namo Bhagvantam

-: नमो अरहन्तं :- (लय : बाबो अलबेलो..) नमो अरहंन्त, नमो भगवन्तं ।  पार लगाए नौका, नमो महामन्तं ॥ १. राग ने द्वेष जिसमें, समता सुहाए,  एक ही घाट बकरी, शेर आए जाए।  महिमा निराली प्रभु की, नमो धैर्यवन्तं ॥ २. कोई न भाये तुमको, दिल में बिठाऊं,  रात दिवस क्या, पल-पल ध्याऊं ।  अपने

Jain Bhajan

Gaye Sab Milkar Gaye

(लय : बच्चे मन के सच्चे) गायें सब मिल गायें, अहँ का ध्यान लगायें।  महामंत्र नवकार जपें, मन तन्मय ये बन जाये ॥ ओम् णमो आयरियाणं, सव्व साहूणं के चरणों मे, १. ओम् णमो अरिहंताणं, ओम् णमो श्री सिद्धाणं। ओम् णों उवज्झायाणं । अपना शीश नमाएं ॥ … गायें २. एसो पंचणमुक्कारो, सव्वप्पाव पणासणो ।

Jain Bhajan

Japlyo Re Bhai Navkar

जपल्यो रे भाई नवकार जपल्यो रे भाई नवकार, इससे दुःखड़ा मिटता है।  मंत्र बड़ा नवकार, लख चौरासी कटता है। बोलो, णमो अरहंताणं, णमो श्री सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं ॥ ध्रुव ॥ १. पांच पदों की यह, अद्भुत माला है।  पीलो रे भाई, अमृत का प्याला है।  मोक्ष का रास्ता, बड़ा

Scroll to Top