Author name: Sunita Dugar

Bhikshu Swami

Mhari Sans Sans Me Bole Re Savriya Swamiji

सांस-सांस में बोले स्वामीजी म्हारे सांस-सांस में बोले रे, सांवरिया स्वामीजी  ओ परबत है राई रे औलेरे, गुण दरिया स्वामीजी  निजर पसार निहारुं सामां, उबा दिखै स्वामीजी  पल-पल, विष में अमृत घोले रे, सांवरिया स्वामीजी बात बात में शब्द शब्द में, घुर फिर आवे स्वामीजी  म्हारे घूमे औले दौले रे, सांवरिया स्वामीजी  कान लगार सुनूं […]

Bhikshu Swami

Aao Aao Bhikshu Swami

आवो आवो भिक्षू स्वामी (लय : तेजा) आवो आवो भिक्षु स्वामी ! अब तो म्हारै आंगणियै,  ऊभा अड़ीकां कद का आपनै  पक्ष उजलो तिथि है तेरस घट में म्हारै चान्दणियो,  श्रद्धा रा फूल बिछावां सामनै ॥ स्थायी ॥ शब्द-शब्द और श्वास-श्वास में, भिक्षू री झणकार उठै। खातां पीतां सोतां उठतां, खोजां भिक्षु गया कठै  दर्शन

Paras

Jay Bolo Parshv Jineshwar Ki

जय बोलो पार्श्व जिनेश्वर की (लय : ओम् शांति जिनेश्वर) जय बोलो पार्श्व जिनेश्वर की।  जय ज्योतिर्मय जगदीश्वर की ।। ध्रुव ॥ प्रभु पार्श्व जाप से कष्ट कटे,  भव-भव का सब सन्ताप मिटे।  मंत्राक्षर संज्ञा प्रभुवर की ॥१ ॥ दुख नाग युगल का दूर किया,  नवकार मंत्र से बोध दिया।  बस फले कामना विषधर की

Paras Prabhu

Samru Samru Re Paras Dev Ne

समरूं समरूं रे पारस देव ने (लय : जन्मया-2 रे मीराबाई मेड़ते) समरूं समरूं रे पारस देव ने कांई समरयां संकट जाय, वामा सुत प्यारो रे  वासि वासि रे काशी देस रा कांई वाराणसी रो वास वामा सुत प्यारो रे कुल रो दिवलो रे, कंवर अश्वसेन रो कांई है त्रिभुवन रो ताज, वामा सुत प्यारो

Paras

Vama Nandan Shat Shat Vandan

वामानंदन शत-शत वंदन लय : मिलो न तुम तो… वामावंदन! शत-शत वंदन, श्रद्धा के आधार ।  आपकी शरण मिली, जीवन ज्योत जली // १. नाम तुम्हारा पारस, पावन बनाता तेरा जाप है,  शीतल तुम्हारी आभा, हरती हर दिल का संताप है। शक्तिदाता, भाग्यविधाता, तुम हो तारणहार ॥ आपकी शरण…… २. आस्था के दीपों से, अर्चना

Paras

Tumse Lagi Lagan

तुमसे लागी लगन तुमसे लागी लगन, ले लो अपनी शरण।  पारस प्यारा, मेटो-मेटो जी संकट हमारा | निस दिन तुमको जपू, पर से स्नेह तजु ।  जीवन सारा तेरे चरणों में बीते हमारा ॥टेर ॥ अश्वसेन जी के राज दुलारे, वामा देवीके सुत प्राण प्यारे। सबसे नेहा तोड़ा, जग से मुंह को मोड़ा, संयम धारा

Paras

Prabhu Parshvdev Charno Me

पार्श्व नाथ स्तुति प्रभु पार्श्व देव चरणों में, शत्-शत् प्रणाम हो।  मेरे मानस के स्वामी ! तुम एक धाम हो । १. दुनियां में देव लाखों, हैं पूजे जा रहे । जिनदेव ! इस रसना में, तेरा ही नाम हो ॥ २. तुमसे न राग रत्ती, क्यों द्वेष औरों से ?  यह वीतरागता तेरी, मेरा

Jain Bhajan

Chod Diya Gharbar Nemaji

(लय : चांदी की दीवार न तोड़ी) छोड़ दिया घरबार नेमजी, सुखवैभव को छोड़ दिया, संयमपथ को धार नेमजी, भवसागर को पार किया ।। ध्रुव ॥ १. आये तो थे ब्याह रचाने, छाई हुई थी खुशियाली  तीन लोक के जानने वाले, देखी वहां घटा काली  लाखों पशु बिलखते रोते, मौत अभी आने वाली  उनकी करुण

Jain Bhajan

Shanti Jineshwar

शांति जिनेश्वर शांति करो लय : शान्ति करों सव विघ्न हरों ओम शांति जिनेश्वर शांति करो, शांति करो सब विघ्न हरो। घट घट में अभय पीयुष भरो ॥ ध्रुव ॥ १. तुझ नाम लिया दुःख द्वन्द मिटै, झट डाकिन भूत पिशाच हटे विष उतरै विषधर काले रो॥ २. दुष्काल मृगी अरु मरी टलै, भूचाल भयंकर

Jain Bhajan

Neminath

भगवान नेमिनाथ की बारात (लय : चांदी की दीवार) शादी करने आये नेमजी कांकड़ डोरा तोड़ दिया  तोरण पर आकर प्रभु ने रथ का मुखड़ा मोड़ दिया हाथी, घोड़े, रथ पैदल बारात बड़ी ही भारी थी  श्याम सलौने नेम कंवर की छवि बड़ी ही प्यारी थी  छप्पन कोड़ी आये बाराती यह तो सब से न्यारी

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