Mahamantra Navkar Sumiran
महामंत्र नवकार, सुमिरण नित्य करोजी, नित्य करो। जैनागम का सार, प्रातः ध्यान धरोजी, ध्यान धरो। १. श्रावक का आचार, पहला बतलाया जी, बतलाया। शुभ मन जपते जाप, मुक्ति-पद पाया जी, पद पाया। २. है स्वार्थ भरा संसार, कोई नहीं अपना जी, नहीं अपना। सुख-दुःख में आधार, नव पद है शरणाजी, है शरणा॥ ३. ले शरण […]