Author name: Sunita Dugar

Jain Bhajan

Mahamantra Navkar Sumiran

महामंत्र नवकार, सुमिरण नित्य करोजी, नित्य करो। जैनागम का सार, प्रातः ध्यान धरोजी, ध्यान धरो। १. श्रावक का आचार, पहला बतलाया जी, बतलाया। शुभ मन जपते जाप, मुक्ति-पद पाया जी, पद पाया। २. है स्वार्थ भरा संसार, कोई नहीं अपना जी, नहीं अपना। सुख-दुःख में आधार, नव पद है शरणाजी, है शरणा॥ ३. ले शरण […]

Jain Bhajan

Japlo Shree Navkar

(लय- मिलो न तुमतो) तन्मय होकर, मन को धोकर, जपलो श्री नवकार।  णमो अरिहंताणं, णमो श्री सिद्धाणं,  सब दुख हर्ता, मंगल कर्ता, महामंत्र नवकार।  णमो अरिहंताणं णमो श्री सिद्धाणं ॥ ध्रुव ॥१.  मोह को जिन्होंने मारा, अरिहंत देव विश्वाधार है।  अष्ट कर्म नष्ट किए, सिद्ध प्रभु अपुनरवतार है।  अशरण शरणं, भव भय हरणं परमात्मा अविकार

Jain Bhajan

Gaye Sab Milkar Gaye

गायें सब मिल गायें (लय : बच्चे मन के सच्चे) गायें सब मिल गायें, अहँ का ध्यान लगायें।  महामंत्र नवकार जपें, मन तन्मय ये बन जाये ॥  ओम् णमो अरिहंताणं, ओम् णमो श्री सिद्धाणं।ओम् णमो आयरियाणं ओम नमो उवज्झायाणं ओम्  नमो सव्व साहूणं के चरणों मे,   अपना शीश नमाएं ॥ … गायें २. एसो पंचणमुक्कारो,

Jain Bhajan

Om Ka Anup Roop

मंत्र नवकार है (लय : चुप-चुप खड़े हो……….) ॐ का अनूप रूप मंत्र नवकार है,  सर्व सिद्धिदायक जपो मंत्र नवकार है – २ १. णमो अरिहंताणं पद यह महान है,  सर्व सिद्धियों का मंगल प्रधान है।  मंत्राधिराज वीतरागता साकार है। सर्व सिद्धिदायक २. णमो सिद्धाणं अद्वितीय मंत्र है,  सच्ची उपासना से बनता स्वतंत्र है,  विघ्न

Jain Bhajan

Shraddha Vinay Samet

(लय : धर्म की जय हो) श्रद्धा विनय समेत, णमो अरहंताणं ।  प्रांजल-प्रणत-सचेत, णमो अरहन्ताणं ॥ ध्रुव ॥ आध्यात्मिक-पथ केअधिनेता।  वीतराग प्रभु विश्व विजेता।  शरच्चन्द्र सम श्वेत, णमो अरहन्ताणं ॥ ध्रुव ॥१ ॥ अक्षय, अरुज अनन्त अचल जो।  अटल, अरूप-स्वरूप जो,  अजरामर अद्वैत, णमो श्री सिद्धाणं ॥ ध्रुव ॥ २ ॥ । धर्म-संघ के जो

Mahavir Swami

Dharti Ke Ban Gaye Devta

(लय- जहां डाल डाल पर) धरती के बन गए देवता धरती के बन गए देवता, क्या गुण गरिमा गाएं । हम भक्ति थाल सजाएं, श्रद्धा से शीष झुकाएं ।। १. जो आया महावीर शरण में, उसके संकट कट गए, पाकर तेरी ज्ञान ज्योति को, भ्रम के बादल फट गए ।  मन के दीप जले लाखों

Mahavir Swami

Om Jay Trishala Nandan

ॐ जय त्रिशलानन्दन ! ॐ जय त्रिशलानन्दन ! स्वामी जय त्रिशलानन्दन ! करुणा दृष्टि निहारो, तोड़ो भव बन्धन ।। १. श्रद्धा विनय भक्ति से, तारो पार उतारो, हे ! करते हम वंदन । भव-दुःख भंजन ।। २. जनमें सुद तेरस को, तुम क्षत्रियपुर में । छिम-छिम, छिम-छिम बाजी, झालर घर-घर में ।। ३. त्रिशला लाल

Mahavir Swami

Kare Hum Veer Prabhu Ka Dhyan

(लय- धर्म की लौ जलाये हम) करें हम वीर प्रभु का ध्यान । करुणानिधि ! करुणाकर ! तारो, कर दो अब कल्याण ।। १. अन्त किया आठों कर्मों का, केवल दीप जलाया, अतिशय धारी, पर उपकारी, सोया शौर्य जगाया ।  अजर अमर अविनाशी तुमने, प्राप्त किया निर्वाण ।। 11 २. चौरासी में घूम रहे हम,

Mahavir Swami

Shraddha Se Naman Kare Hum

श्रद्धा से नमन करें हम, तेरा अनुसरण करें हम । पल-पल में स्मरण करें हम, महावीर स्वामी ।। १. भौतिक सुख छोड़ सारे, संयम का पथ अपनाया, ममता के तोड़ धागे, आत्मा में ध्यान लगाया । जग को परिवार बनाया, तूं मैं का भेद मिटाया,  करुणा का रस बरसाया, महावीर स्वामी ।। २. भीषण उपसर्ग

Mahavir Swami

Bhagwan Tumhara Dhyan Dharu

भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं महावीर तुम्हारा ध्यान धरूं अन्तर-आत्मा का ज्ञान करूं १. हर सांस गीत बने मेरा, हर चरण जीत बने मेरा । आनन्द सुधा का पान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।। २. मिटे निराशा का घेरा, हो सदा प्रफुल्लित मन मेरा । समता सरिता में स्नान करूं, भगवान

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