Author name: Sunita Dugar

Mantra, Vedic

Shree Hanuman Chalisa

दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुर सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायक फल चारि।। बुद्धि हीन तनु जानिकै सुमिरौं पवन कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार।। चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीश तिहुँ लोक उजागर।। राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। […]

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Ganesh Ji V Sabhi Pramukh Devtao Ke Mantra

ये हैं गणेश जी के मंत्र नाम और उनके अर्थ ॐ सुमुखाय नमः सुमुख – सुंदर मुख वाले ॐ एकदंताय नमः एकदंत – एक दांत वाले ॐ कपिलाय नमः कपिल – भूरे, सिंदूरी और बादामी रंग वाले ॐ गजकर्णाय नमः गजकर्ण हाथी के जैसे कान वाले ॐ लंबोदराय नमः लंबोदर – बड़े पेट वाले ॐ

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Mahamrityunjay Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।  उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् Om Trayambakam Yajamahe Sugandhim pushti-vardhanam Urvārukam-iva bandhanāt Stymukshīya māmritāt Hindi Meaning: हम भगवान शिव शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो अपनी कृपा से पूरी दुनिया की देखभाल कर रहे हैं। हम उससे प्रार्थना करते हैं की वह हमें मृत्यु के बंधन

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Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं  भर्गो देवस्य धीमहि  धियो यो नः प्रचोदयात् । मंत्र के फायदे ॐ गायत्री मंत्र बहुत ही चमत्कारी और शक्तिशाली माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक इस मंत्र के 24 अक्षर 24 महाशक्तियों के प्रतीक होकर शक्ति बीज हैं। वेदों में गायत्री शक्ति ही प्राण, आयु, शक्ति, तेज, कीर्ति और

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Mahavir Prabhu Stavan 24

24 chobisi महावीर प्रभु स्तवन नहीं इसो दूसरो जगवीर,  उपसर्ग सहिवा अडिग जिनवर, सुरगिरि जेम सधीर। 1. चरम जिनेन्द्र चौबीसमा रे, अघ हणवा महावीर। विकट तप वर ध्यान धर प्रभु, पाया भव जल तीर ॥ 2. संगम दुख दिया आकरा पिण, सुप्रसन्न निजर दयाल। जग उद्धार हुवै मो थकी रे, ए डूबै इण काल ॥

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Parshvnath Stavan 23

23 पार्श्वनाथ प्रभु स्तवन पारस देव! तुम्हारा दर्शन भाग भला सोई पावे हो।  भाग भला सोई पावे, हूं वारि जाऊं, जीव मगन हो ज्यावै हो पारस देव । 1. लोह कंचन करै पारस काचो, ते कहो कर कुण लेवे हो। पारस तू प्रभू साचो पारस, आप समो कर देवै हो । 2. तुझ मुख-कमल पासै

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Arishat Nemi Prabhu Stavan 22

22 अरिष्टनेमि प्रभु स्तवन प्रभु नेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी। रिठनेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी ॥ 1. तूं तोरण स्यूं फिर्यो जिन-स्वाम, अद्भुत बात करी तें अमाम। प्रभु नेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी ॥ 2. राजिमती छांडी जिनराय, शिव-सुन्दर स्यूं प्रीत लगाय। प्रभु नेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी॥ 3. केवल पाया ध्यान वर ध्याय, इन्द्र

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Nami Prabhu Stavan 21

21 नमि प्रभु स्तवन प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे। मुझ प्यारा प्राण आधारा ॥ 1. नमिनाथ अनाथां रा नाथो रे, नित्य नमण करूं जोड़ी हाथो है। कर्म काटण वीर विख्यातो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥ 2. प्रभु ध्यान सुधारस ध्याया रे, पद केवल जोड़ी पाया रे। गुण उत्तम-उत्तम आया, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥ 3.

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Muni Svuart Prabhu Stavan

20 मुनिसुव्रत प्रभु स्तवन प्रभूजी ! आप प्रबल बड़ भागी। त्रिभुवन दीपक सागी रा॥ 1. सुमित्रनन्दन श्री मुनिसुव्रत, जगतनाथ जिन जाणी। चारित्र ले केवल उपजायो, उपशम रस नीं वाणी रा॥ 2. चौतीस अतिशय पैंतीस वाणी, निरखत सुर इन्द्राणी। संवेग रस नीं वाणी सांभल, हरष स्यूं आंख्यां भराणी रा॥ 3. शब्द-रूप-रस-गंध-परस, प्रतिकूल न हुवै तुम आगे।

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Malli Prabhu Stavan

मल्लि जिनेश्वर नाम समर तरण शरण आयो। 1. नील वर्ण मल्लि जिनेश्वर, ध्यान-निर्मल घ्यायो। अल्प काल मांहि प्रभु, परम-ज्ञान पायो । 2. कल्प पुष्पमाल जेम, सुगंध तन सुहायो। सुर-वधू वर नयन-भ्रमर, अधिक ही लिपटायो। 3. स्व पर चक्र विविध विघन, मिटत तो पसायो। सिंघनाद थकी गजेन्द्र, जेम दूर जायो । 4. वाण विमल निमल सुधा-रस

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