“Majhdhar Me Hai Naiya”
(तर्ज : संसार है एक नदिया……) मझधार में है नैय्या, ओर वो भी पुरानी है, अब तुम को जगदम्बा, इसे पार लगानी है।। ना जानूं मैं पूजा, ना मन ही पावन है, बस तुम्हें चढ़ाने को, आंखों में सावन है, एक फूल है मुरझाया, मरे दिल की निशानी है ।।1।। तुम सााथ नहीं हो तो, […]