Author name: Sunita Dugar

Chaubisi

Ho Prabhu Chand Jineswar Chand Jisa

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. चन्द्रप्रभु स्तवन (लय: शिवपुर नगर सुहामणो) प्रभु ! चन्द्र जिनेश्वर ! चन्द जिसा। 1. हो प्रभू! चंद जिनेश्वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो। प्रभु! उपशम रस जन […]

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Bhajiye Nitya Swami Supas A

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. 7 (लय : कृपण दीन अनाथ ए) सुपार्श्वप्रभु स्तवन भजियै नित्य स्वामी सुपास ए। 1. सुपास सातमां जिणंद ए, ज्यांनै सेवै सुर नर बंद ए। सेवक पूरण आश ए, भजिये

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Padam Prabhu Nit Samriye

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. 6 पदम प्रभू नित समरियै। 1. निर्लेप पदम जिसा प्रभू, प्रभु पद्म पिछाण।  संयम लीधो तिण समै, पाया चोथो नाण ॥ 2. ध्यान शुकल प्रभु ध्याय नें, पाया केवल सोय।

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Sumati Jineswar Sahib Shobhta

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. 5 सुमति प्रभु स्तवन (लय : मूरख जीवड़ा रे गाफल मत रहे) सुमति जिनेश्वर साहिब शोभता। 1. सुमति जिनेश्वर साहिब शोभता, सुमति करण संमार सुमति जप्यां थी सुमति बधे घणी,

Chaubisi

Abhinandan Bandu Nit Nirmali

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. 4 अभिनन्दन प्रभु स्तवन अभिनंदण वांदू नित्य मनरली।(लय : सती कलूजी हो थाया संजम नै त्यार) 1. तीर्थकर हो चोथा जग छांड गृहवास करी मति निरमली। विषय-विटंबण हो तजिया विष

Additional / अन्य

Sanbhav Sahib Samriye

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection. 3 संभव प्रभु स्तवन संभव साहिब समरियै।(लय : हूँ बलिहारी हो जादवां) 1. संभव साहिब समरिये, घ्यायो है जिन निर्मल ध्यान के। एक पुद्गल दृष्टि थाप नै, कीधो है मन मेरू समान के॥ 2.

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Aho Prabhu Tum Hi Dayak Shiv Panth Na (Ajitprabhu) 2

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. 2 (लय : अहो प्रिय तुम बाट पाड़ी) अजितप्रभु स्तवन अहो प्रभु ! तुम ही दायक शिव-पंथ ना। 1. अहो प्रभू! अजित जिनेश्वर आपरो, ध्याऊं ध्यान हमेश हो। अहो प्रभु

Chaubisi

Chobosi Dohe (duha)

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. चौबीसी श्रीमज्जयाचार्य दूहा १. ॐ नमः अरिहन्त अतनु, आचारज उवझाय ।  मुनी पंच परमेष्ठि नुं, ऊंकार रै मांय ।। २. बलि प्रणमूं गुणवंत गुरु, भिक्खू भरत मझार ।  दान दयादिक

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Aadinath Stuti

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints. 1 आदिनाथ स्तवन (लय : ऐसे गुरु किम पाइयै) प्रणमूं प्रथम जिनन्द नैं जय जय जिन चंदा 1. वन्दू बेकर जोड़ नें, जुग आदि जिनिन्दा ।  कर्म-रिपु-गज ऊपरै, मृगराज मुनिन्दा

Deshbhakti

Mharo Pyaro Rajasthan

यह सांस्कृतिक और परंपरागत गीत है। A cultural and traditional song. सै’ री आँखडल्यॉ रो तारो—- सै’री ऑखडल्यों रो तारो म्हारो प्यारो राजस्थान प्यारो राजस्थान म्हारो प्यारो राजस्थान, सैरी गोरां गोरां टीबां ऊपर खेत खड्या मुस्कावै,  नैणा सुरमो सार गोरड़ी भातो लेकर आवै ।  गावै अलगोजा री तान म्हारो प्यारो हमारो राजस्थान ।।१।। राणा सरीखा

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