Author name: Sunita Dugar

Jain Bhajan, Paryushan

Chadariya Nai Rangayi Hai (khamat Khamna Geet)(paryushan)

खमत-खामणा गीत (तर्ज : तावड़ो धीमो पड़ज्या रे….) – साध्वी श्री राजीमतीजी चदरिया नयी रंगाई है-२ यदि रागद्वेष रो दाग लागग्यो, क्षमा सफाई है।चदरिया नयी रंगाई है-२  1. हाथ जोड़ सगलां स्यूं म्हांरा, खमत खामणा है।  बिना खमायां गति बिगड़ै, आसूत्र-धारणा है।  समाई खरी कमाई है। कि समता खरी कमाई है। 2. खमत खामणा मनस्यूं […]

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Diwas Manaye Hum (paryushan)

मैत्री दिवस मनायें हम (लय-धीरे धीरे बोल…) मैत्री दिवस मनायें हम, मन को विमल बनायें हम । सरल हृदय बन जायें हम, सबसे आज खमायें हम । हम ग्रंथियों को खोल लें, रूठों से हंसकर बोल लें ।। ।। भूलों का पुतला होता इन्सान । हंसता रोता करता है तूफान । नादान भी, गुणवान भी,

Jain Bhajan, Paryushan

Jaha Janam Janam Ke Ver Bhav Ka Hota Hai Nistara( Khamat Khamna)

पर्युषण प्यारा (लय : जहां डाल डाल पर….) जहां जनम जनम के वैर भाव का होता है निस्तारा। ये दिन संवत्सरी प्यारा-२ जहां प्राणी मात्र से प्रेम भाव का जो करता है इशारा ये पर्व पर्युषण प्यारा-२ जय शासनम् जिन शासनम् ।। ध्रुव ।। यहां कालचक्र की गति बनाई, नहीं अंत नहीं आदि’  घट बढ़

Guru

Guru Darshan Geet

(लय- माय नी माय मुंडेर ) पूज्य वरों के श्री चरणों में (ज्ञानशाला दिल्ली की प्रशिक्षिकाओं द्वारा प्रस्तुत गीत – साध्वी जी कनकश्रीजी) ज्योति पुंज की ज्योति रश्मियां प्रज्ञा ज्योति जगाए। महाबोधि मंदार आर्य की अभिनव श्री सुषमाएं ।।  वंदन वंदन शत-२ वंदन । भरदों जीवन में नव स्पंदन ।। ① मौसम कितना आज सुहाना

Guru Swagat Geet

Aaj Basanti Hawa Chali Hai (Guru Swagat)

आज बसंती हवा चली… (लय-होलियां में उड़े रे…) आज बसंती हवा चली है,-२  बागां में आयो ऋतुराज । गुरु दर्शन पाया ।। आं।। आंगणियै में सुरतरू छायो । मंगल गावा आज ऊजली ऊजली सड़कां बणी है घर-घर सज रह्या स्हाज । आज बड़ो है उत्सवै म्हारै । खुशिया बेअन्दाज ।।३।। स्वागत करता रूं रू नाचै

Jain Bhajan, Paryushan

Barse Bhadudo Rim Jhim (paryushan Parv)

बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम (लय-अपने पिया की…) मिलजुल कर आज सारा पर्युषण मनावां । बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम । धर्म जगावा आवो पर्युषण मनावां ।। आं ।। जैन धर्म रो महापर्व ओ शुभ संदेशो ल्यायो है । मोह नींद स्यू जागो लोगां सुंदर अवसर आयो है । मैत्री रा गीत गावां होSSSSS हरषावां ।।१।। अपणै

Jain Bhajan, Paryushan, Terapanth

Kshamayachana Geet (Saptlaskh Je Jati Prithwi) पर्युषण

क्षमा याचना गीत श्रीमज्जयाचारय‌ सप्त लक्ष जे जाती पृथ्वी श्री सप्त लक्ष अपकाय, इत्यादिक चउरासी लाख जे जीवायोनि खमाय ।  सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।१।। गण में सन्त सती गुणवन्ता, सगला भणी खमाय ।  निज आतम प्रति नरम करी नै, मच्छर भाव मिटाय ।। सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।२।। किणहिक सन्त सती सूं

Bhikshu Swami

Namo Guru Devanam

णमो गुरुदेवाणं    (लयः श्रद्धा विनय…..) रचयिता : साध्वी सिद्धप्रज्ञाजी उगी सुनहली भोर, णमो गुरुदेवाणं ।  प्रमुदित है हर पोर, णमो आयरियाणं ।। १. तेरापंथ के भाग्य निराले,  एक-एक से बढकर आले । भैक्षवगण सिरमौर ।। २. आर्य भिक्षु की अभिनव शैली,  ना कोई अपना चेला चेली । अनुशासन की डोर ।। ३. धर्म-क्रांति की

Guru

O Sashan Ka Sirtaj Tu Mhane Pyara Lage Se

(लय-म्हार हीरा जड़ियो आंगणियो कुण मैलों करग्यो रे ) मंद मंद मुस्कान तेरी मनड़े ने घणी लुभावै  तेरे चरणा की रज धुलि भव से पार लगावे-2 ओ शासन के सरताज तू तारण हारा लागे से -2  मै जपू सबेरे शाम नाम तेरा प्यारा लागे से माँ नेमा जी के लाल नाम तेरा प्यारा लागे से

Tapsya

Mhare Hivade Me Harsh Vibhor (Tapsya Geet)

म्हारा हिवडा में हर्ष हिलोर (तर्ज – म्हारा हिवडा में नाचे मोर…) म्हारा हिवडा में हर्ष हिलोर, शुभ अवसर आया  हम आकर भाव विभोर, तपस्वी गुण गावा  पुलकित तन मन, खुशी का सरगम,  खिल गई जीवन बगियाँ ये तप तो कितना पावन है, जैसे महके घी – चंदन है  एसी खुशबुसे, ऐसी भक्तिसे, महका तपस्वी

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