Author name: Sunita Dugar

Bhikshu Swami

Om Bhikshu OM Japo Sada

ओम भिक्षु जपो सदा ओम भिक्षुओम भिक्षु जपो सदा, चाह फले मुक्ति मिले । है नाम मंगलकारी, विघ्न बाधाहारी, विघ्नबाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।। असहायों का भिक्षु नाम सहारा है-सहारा है,  घोर अमा में करता दिव्य उजारा है, उजारा है,  ओम भिक्षु पंगु को पहाड़ चढाता है,  मूक मनुज को वाणी वर मिल […]

Bhikshu Swami

Kelawa Ke Yogi Tere Nam Ka Sahara Hai

शूरवीरो को धरा महान राजस्थान है  भिक्षु की जन्म भूमि कंटालिया ग्राम है।  गुलामी की जंजीरों से त्रस्त सारा देश था।  शिथिल विचारों से धर्म निस्तेज था ।।  आषाढी तेरस सन्‌ तैयासी प्यारा है  दीपाजी के लाल (बल्लूशा) जन्मा कुल उजियारा  है केलवा के योगी तेरे नाम, का सहारा  है।   बचपन प्रखर प्रतिभाकी निशानी

Guru

Pa Darash Aapke Guruvaram

(लय- अजीब दास्तां है ये) पा दरश आपके गुरुवरम्  महका है गंगा जल सा ये मन  कैसे करें अभिव्यक्ति भावों की  आये है सौभाग्य शाली क्षण । उठतेजपे, चलते जपे गुरु हीशाम भोर है  गुरु बुद्धि, गुरु चित ,गुरु मन विभोर है,  गुरु रात्रि, गुरु दिवस, गुरू स्वपन शयन है  गुरू काल, गुरु कला गुरु

Bhikshu Swami, Terapanth

अ भी रा शि को उदारी हो (विघ्न हरण की ढाल)Abhi Ra Shi Ko Udari Ho (Vighn Haram Ki Dhal)

 धम्म-जागरणा विघ्न-हरण  श्रीमज्जयाचार्य अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो, धर्ममूर्ति धुन धारी हो, विघ्नहरण वृद्धिकारी हो, सुख संपति दातारी हो । भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।। १. भिक्षु भारीमाल ऋषिरायजी, खेतसीजी सुखकारी हो, हेम हजारी आदि दे, सकल संत सुविचारी हो । प्रणमूं हर्ष अपारी हो ।। २. दीपगणी दीपक जिसा, जयजश करण उदारी हो,  धर्म-प्रभावक

Tapsya

Karke Tapsya Tan Ko Tapaya

(कितना बदल गया इन्सान) कर के तपस्या, तन को तपाया, आप हैं बड़े महान,  करें हम सब मिलकर सम्मान,  करें हम सब मिलकर बहुमान । (२) । ① अरे सोना जब है आग में तपता तभी तो वो है कुन्दन बनता। संस्कार गर अच्छा मिलता,  तभी तो सच्चा मार्ग है दिखता।  धर्म की जड़ तो

Bhachya, Tapsya

Anumodna Anumodna

(लय- आ चल के तुझे मैं दिखलाऊं) अनुमोदना, अनुमोदना अनुमोदना बारम्बार।  तपस्या को है, तपसी को है। वंदन है बारम्बार । विषयों से भरा, संसार पूरा आसान नही है यहां।  मन वश मे रहे, कुछ भी न कहे, दुष्कर है ये काम बङा ।।1।। तप जीत गया, मन हार गया। संयम का ये सत्कार। आसान

Mahavir Swami

Mahavir Ki Vani Ko Ghar Ghar Pahuchana Hai

( लय- संसार है इक नदिया (रफ्तार) महावीर की वाणी को घर-2 पहुंचाना है।  निर्वाण महोत्सवको जो सफल बनाना है बलिदान प्रथाओं से धरती भी थर्रायी  अवतार लिया प्रभु ने ने सुख सरिता लहरायी  सिखलाई जीव दया उसको न भुलाना है  जीयो, और जीने दो सद्‌भाव रहे मन मे ! . गिनती के श्वास भरे

Guru

Guru Mera Mandir Guru Meri Pooja

गुरु मेरी पूजा गुरुगोबिन्दगुरु मेरा पारब्रह्म गुरु भगवंत  गुरु मेरा मन्दिर गुरु मेरी पूजा, गुरु मेरा पारब्रह्म  और न दूजा गुरु मेरा दाता भाग्य विधाता-२, विधाता  हर सुख साधन का गुरु ही प्रदाता  गुरु मेरी नैया गुरु ही खेवेया – 2  गुरु मेरी मंजिल गुरु मेरी छैया  गुरु ही ही किनारा, गुरु ही सहारा-2  गुरु

Shivji

Shiv Mahima Stotram

श्रीशिवमहिम्नः स्तोत्रम् * निम्न स्तुति के रचयिता गन्धर्वराज श्रीपुष्पदन्त थे।  इनकी यह रचना पुष्पदन्त विरचित श्रीशिवमहिम्नः स्तोत्र के नाम से प्रसिद्ध हुई। ।। श्रीपुष्पदन्त उवाच ।। महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः। अथावाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन् ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः ।। । ।। (गन्धर्वराज पुष्पदन्त भगवान् शंकर की स्तुति के उपक्रम में

Shivji

Dwadash Jyotirlingashatkam ,—Aadi Shankaracharya Virchit

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ! भक्तप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये !! 1 !! श्रीशैलशृङ्‌गे विविधप्रसङ्‌गे शेषाद्रिश्रृङ्गेऽपि सदा वसन्तम् ! तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेनं नमामि संसारसमुद्रसेतुम् !! 2 !! अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् ! अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् !! 3 !! कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ! सदैव मान्धातृपुरे वसन्तं ओङ्‌कारमीशं शिवमेकमीडे !! 4 !! पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने

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