Author name: Sunita Dugar

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Kar Kilol, 2. Mera Nam Hai Gangouri (Ghodi)

Ghodi  कर किल्लोल म्हारी घोड़ी अनमोल, रिमझिम करती चाली आज । घुमर घाले ठुमके स्यूं चाल, जासी साजनिय घर आज ॥ इतराके लगावै कदै ठुमको,  हाँ ठुमको, कद घुघरा बजावै, कदे नखरा दिखावे  वा तो थिरक थिरक कर नाचे हाँ, कर किल्लोल हिण हिण के दिखावै कदै लटको हाँ लटको – २ बड़ी मदमाती, आतो […]

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Devta Ji Ki Ghodi

1devtavji ki Ghodi  पीपली पान दुपानी ओ राज, गेरो फूल गुलाब रो  जठ तेजण घोड़ी बांधी ओ राज, हरीया हरीया जौ चर । ज्यां पर राम लक्ष्मण चढ़सी ओ राज, जनकपुर जनकपुर कर रया ।  कोई म्हान जनकपुर बतावो ओ राज, कोई म्हान सीता आन मिल ।  अर्जुन जनकपुर बतासी ओ राज, सुर्जन सीता आन

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Ghodi

*** Ghodi  घोड़ी ए चान्द सूरज दरवाज,  अंग्रेजी बाजो बाज ए घोड़ी घुघरा बजाव । घोड़ी ए अधर अधर पग मेलो, म्हा रो सुत्यो शहर जगाव ए घोड़ी घुघरा बजाव,  म्हारो रुठ्यो गोत मनाव ए घोड़ी घुघरा बजाव ।  घोडी ए दादोजी र मुलाव, घोड़ी ए बावोजी रे मुलाव, दादीजी दुध पिलाव ए घोड़ी घुघरा

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Ghodi

Ghodi  (तर्ज – पणीहारी …) कठोड़ स्यू घोड़ी उतरी, ओ केशरिया ओ राज रंगभरिया ओ राज, कडे कियो श्रृंगार बनासा । उदीयापुर स्यू घोड़ी उतरी ओ केशरीया ओ राज, विकाण में सज्यो सीणगार बनासा । ए कणजी घोड़ी मोलसी ओ केशरीया ओ राज,  ए कुण खर्चला दाम बनासा  दादाजी घोड़ी मोलसी ओ केशरीया ओ राज,

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Bane Ki Ghodi

Ghodi-1 महला में ढोल बाजे, गलीयां म गाजेजी कोई आंगणीय म मंगल गावे, बेना सारी जी।  हरख मनावों जी बागां में फूल खिलिया, कलीयां मुस्कायी जी – २  कोई बागों में दौड़ी दौड़ी आई, भुवा मारी जी ॥  हरखे सुणोजी बाबोजी म्हारी, घोड़ी न बुलाओ जी २ कोई घोड़ी रा दाम बखाने, घोड़ी वालो जी

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Bannne Ki Ghodi

(तर्ज – मेरा पिया घर आया ओ रामजी …) नखरा दिखाती आई घुघरु बजाती आई, घोड़ी मस्तानी आई रे बाजे अंगरेजी बाजा,  घोड़ी पर बैठ्यो राजा – राजा रे रानी आई रे म्हारे बनड़े री घोड़ी है नाचनी – ४ थारी चाल सुहानी मन मोहे – थांरे छैल छबीलो रंग सोहे नखरों पे वारी जावे

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Suhag Ke Geet

3सुहाग बनड़ो तो पुछ बनी लाडली हां ए बनी किस वीध लम्बा थांरा केश सुहाग राज बिड़ला । माथो तो न्हायो काच दूधस्यूं, हां ओ बना इस विध लाम्बा म्हारा केश, सुहाग  बनड़ो तो पुछ ए बनी लाडली, हां ए बनी किस विध तिखा थारा नैन, सुहाग सुरमो तो सारयो मूंग मोलरो, हां ओ बना

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Suhag Ke Geet

1 सुहाग बनड़ी सुहाग मांगण चाली अपर, दादाजी र दरवार, लाडली सवाग मांगण चाली अपर बाबा र दरबार, दादाजी देओ नी सुहाग, बाबाजी देवो नी सुहाग  आली भोली न सुहाग, अखन कंवारी न सुहाग,  पीवर पुरी न सुहाग, ए मां मै क्या जाणु  कामण ऐसा गुण ल लाग्या लाग्या  ओ राइबर, लाग्या लाग्या ओ सुरजमल, 

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Mhari Haldi To Rang Surang

म्हारी हलदी रो रंग सुरंग निपज मालव,  मुलाव लाडलड़ी रा दादोजी,  दाद्यां र मन रल बारी दाद्यां र मन कोड, कोड घणा कर, हल्दी सीग चढ़ बनड़ी पीठड़ली दिन चार मुलमुल मसलल्यो,  बनड़ी काजलियो दिन चार, नैण घुलायल्यो  बनड़ी मेंदड़ली दिन चार, हाथ रचायल्यो  बनड़ी चावलीया दिन चार, रुच रुच जीमल्यो  बनड़ी न्हाय धोय बैठी

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Pithi Jhol Ke Geet. (पीठी झोल का गीत)

पीठीका गीत १ मगर का मूंग मंगावो ए, म्हारी पीठी मगन करावो ए म्हारी पीठी मगन करावो ए,  रायजादे र अंग लगाबो  म्हार जोशीको भल आयो ए, जोशी लिगन लिखाय र ल्यायो ए  म्हार खातीको भल आयो ए,  खाती बाजोटो घड़ ल्यायो ए म्हार कुम्हारयो भल आयो ए, कुम्हारयो कुम्भ कलश घड़ ल्यायो ए  म्हार

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