Chaubisi

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Abhinandan Bandu Nit Nirmali

4 अभिनन्दन प्रभु स्तवन अभिनंदण वांदू नित्य मनरली।(लय : सती कलूजी हो थाया संजम नै त्यार) 1. तीर्थकर हो चोथा जग छांड गृहवास करी मति निरमली। विषय-विटंबण हो तजिया विष फल जाण ॥ 2. दुःकर करणी हो कीधी आप दयाल, ध्यान सुधारस सम दम मन गली। संग त्याग्यो हो जाणी माया-जाल ॥ नके। 3. वीर […]

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Aho Prabhu Tum Hi Dayak Shiv Panth Na(Ajitprabhu) 2

2 (लय : अहो प्रिय तुम बाट पाड़ी) अजितप्रभु स्तवन अहो प्रभु ! तुम ही दायक शिव-पंथ ना। 1. अहो प्रभू! अजित जिनेश्वर आपरो, ध्याऊं ध्यान हमेश हो। अहो प्रभु ! अशरण शरण तूं ही सही, मेटण सकल कलेश हो॥ 2. अहो प्रभु ! उपशम रस भरि आपरी, वाणी सरस विशाल हो। अहो प्रभु! मुगति-निसरणी

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Aadinath Stuti

1 आदिनाथ स्तवन (लय : ऐसे गुरु किम पाइयै) प्रणमूं प्रथम जिनन्द नैं जय जय जिन चंदा 1. वन्दू बेकर जोड़ नें, जुग आदि जिनिन्दा ।  कर्म-रिपु-गज ऊपरै, मृगराज मुनिन्दा ॥ 2. अनुकूल प्रतिकूल सम सही, तप विविध तपंदा।  चेतन तन भिन लेखवी, ध्यान शुकल ध्यावंदा ॥ 3. पुद्गल-सुख अरि पेखिया, दुख-हेतु भयाला।  विरक्त चित

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Chobosi Dohe (duha)

चौबीसी श्रीमज्जयाचार्य दूहा १. ॐ नमः अरिहन्त अतनु, आचारज उवझाय ।  मुनी पंच परमेष्ठि नुं, ऊंकार रै मांय ।। २. बलि प्रणमूं गुणवंत गुरु, भिक्खू भरत मझार ।  दान दयादिक छाण नै, लीधो मारग सार ।। ३. भारीमाल पट भलकता, तीजै पट ऋषिराय ।  प्रणमूं मन वच काय करी, पांचूं अंग नमाय ।। ४. सिध

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