Abhinandan Bandu Nit Nirmali
4 अभिनन्दन प्रभु स्तवन अभिनंदण वांदू नित्य मनरली।(लय : सती कलूजी हो थाया संजम नै त्यार) 1. तीर्थकर हो चोथा जग छांड गृहवास करी मति निरमली। विषय-विटंबण हो तजिया विष फल जाण ॥ 2. दुःकर करणी हो कीधी आप दयाल, ध्यान सुधारस सम दम मन गली। संग त्याग्यो हो जाणी माया-जाल ॥ नके। 3. वीर […]