Kunthu Prabhu Stavan
17 कुन्थु प्रभु स्तवन प्रभु को समरण कर नीको रे। 1. कुन्थु जिनेश्वर करुणा-सागर, त्रिभूवन सिर टीको रे। प्रभु को समरण कर नीको रे॥ 2. अद्भुत रूप अनूप कुन्थु जिन, दर्शन जग-पी को रे। प्रभु को समरण कर नीको रे॥ 3. वाण सुधा सम उपशम रस नीं, वाल्हौ जगती को रे। प्रभु को समरण कर […]