Form (विधा)

Adhyatmik, Kabir, Nirgun, Satsang, Vairagya

Satsangat Se Sukh Milta Hai

सतसंगत से सुखमिलता है  जीवन का कण-2 खिलता है। सत्संगत से सद्‌ज्ञान मिले  सत्‌संगत से भगवान मिले पानी से पौधा फलता‌ है ② सतसंगत से वैराग्य बढ़े  सतसंगत से सौभाग्य बढ़े  दीपक से दीपक  जलता है ③ नास्तिक भी आस्तिकता पाता  पापी भी पावन बन जाता  चाबी से ताला खुलता है। मानव को  जैसा संग […]

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Maya Ke O Pujari Aage Ki Kuch Khabar Hai

माया के ओ पुजारी आगे की कुछ खबर है।  इस घर से और आगे एक दूसरा भी घर हैं। ① इतना ना जुलम करतू धरती भी काँप जाए।  वरना दुखी की आहे तेरा निशां मिटाये  अब भी जरा संभल तू डर मौत का अगर है। 2) जो पाप कर चुके हैं और अब भी कर

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Jo Bhi Mila Khajana Use Bant Jana Re

मिला खजाना (तर्ज : नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया……….) जो भी मिला खजाना उसको बांट जाना रे। क्या जाने कब होगा इस धरा पर आना रे । । ध्रुव ॥ बहुत कमाया बहुत ही खाया काफी मौज उड़ाई। श्रम से कोड़ी कोड़ी जोड़ी पूंजी खूब बढ़ाई। मिट्टी के सब खेल खिलौने मत फस

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Durlabh Manav Jeevan

दुर्लभ मानव जीवन (लय : ऐ मेरे दिले नादान……..) दुर्लभ मानव जीवन तेरे हाथ मे आया है,  इस क्षण भंगुर जग में, मन क्यों ललचाया है। दुर्लभ……. ॥ ध्रुव ॥ यह तन तो मिट्टी का, एक बना खिलौना है,  इस नश्वर तन को तो, इतना क्या धोना है,  जिसने छोडी ममता उसने सुख पाया है।

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Mat Kar Re Mat Kar Re

-: आखिर तो जाणो पड़सी :- (लय : सुण सुण रे…………) मत कर रे, मत कर रे मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ १. सुख स्यूं जीणो, सुख स्यूं मरणो, अरिहन्तां रो साचो शरणो । बेटा पोता के करसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ २. चार दिनां री चमक

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Kiwadi Khol Hiye Ri

किंवाडी खोल हियैरी (लय : मिलो न तुम हम घबरायें) माटी री मूरत है काया, क्यूं तू देख लुभायो ? किंवाड़ी खोल हियै री। झूठी सारी ममता माया, थोथै भरम भुलायो, किंवाड़ी खोल हियै री ॥ स्थायी ॥ जीणो है थोड़ो सो, किसी बात पर तूं बण्यो आकरो ? खावै पंसेरी री, फैंके जो दूजां

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Jhuthi Jag Ki Maya

झूठी जग की माया (लय : मेरे मन की गंगा) झूठी जग की माया, और मिट्टी की यह काया रे। बोल बन्दे ! बोल, तूने जाना क्यों नहीं। १. खाली हाथ तूं आया जग में, खाली हाथ ही जायेगा, चुग जायेगी खेत ये चिड़िया, हाथ मसल रह जायेगा। पग पग खड़े लुटेरे, तूं लूट जाना

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Thari Ankhya Me Loi Ro Ufan

थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण। छोड़ो क्यूं कोनी क्रोध रो नशो ?  थांरी अक-बक बकणै री पड़गी बाण। दूजां नै काले नाग ज्यूं डसो ॥ ध्रुव ॥  क्रोध बड़ो दुर्गुण दुनिया में, घट-घट में वसनारो। जिण घट में नहि क्रोध निवासी, बो नर जगत-सितारो ॥ पंचेन्द्रिय प्राणी री

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Jindagi Anmol Hai Yah

जिंदगी अनमोल लय : मेरा जीवन कोरा कागज जिंदगी अनमोल है यह, क्यों तूं खो रहा है यही जगने की बेला, क्यों तूं सो रहा। १. तुच्छ भौतिक आस में क्यों, हारता जीवन। मानता जिसको तू अपना, वह पराया धन। है नहीं कुछ भी यहां तू, व्यर्थ रो रहा ॥ २. जाग निद्रा त्याग कर

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Jeevan O Do Din Ro

जीवन ओ दो दिन रो (लय : होठों को छूलो तुम) जीवन ओ दो दिन रो पाणी ज्यूं बह ज्यासी, लारै जस अपजस री, बस बातां रह ज्यासी ॥ध्रुव ॥ १. धन जोबन परिजन रो, संजोग सुरंग मिल्यो, ई तरुवर री डाली, तूं फूल विशेष खिल्यो, पण एक पून झटको, पटकी दे दहलासी ॥१ ॥

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