Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Bhikshu Swami

Aao Aao Bhikshu Swami

आवो आवो भिक्षू स्वामी (लय : तेजा) आवो आवो भिक्षु स्वामी ! अब तो म्हारै आंगणियै,  ऊभा अड़ीकां कद का आपनै  पक्ष उजलो तिथि है तेरस घट में म्हारै चान्दणियो,  श्रद्धा रा फूल बिछावां सामनै ॥ स्थायी ॥ शब्द-शब्द और श्वास-श्वास में, भिक्षू री झणकार उठै। खातां पीतां सोतां उठतां, खोजां भिक्षु गया कठै  दर्शन […]

Mahavir Swami

Dharti Ke Ban Gaye Devta

(लय- जहां डाल डाल पर) धरती के बन गए देवता धरती के बन गए देवता, क्या गुण गरिमा गाएं । हम भक्ति थाल सजाएं, श्रद्धा से शीष झुकाएं ।। १. जो आया महावीर शरण में, उसके संकट कट गए, पाकर तेरी ज्ञान ज्योति को, भ्रम के बादल फट गए ।  मन के दीप जले लाखों

Mahavir Swami

Om Jay Trishala Nandan

ॐ जय त्रिशलानन्दन ! ॐ जय त्रिशलानन्दन ! स्वामी जय त्रिशलानन्दन ! करुणा दृष्टि निहारो, तोड़ो भव बन्धन ।। १. श्रद्धा विनय भक्ति से, तारो पार उतारो, हे ! करते हम वंदन । भव-दुःख भंजन ।। २. जनमें सुद तेरस को, तुम क्षत्रियपुर में । छिम-छिम, छिम-छिम बाजी, झालर घर-घर में ।। ३. त्रिशला लाल

Mahavir Swami

Kare Hum Veer Prabhu Ka Dhyan

(लय- धर्म की लौ जलाये हम) करें हम वीर प्रभु का ध्यान । करुणानिधि ! करुणाकर ! तारो, कर दो अब कल्याण ।। १. अन्त किया आठों कर्मों का, केवल दीप जलाया, अतिशय धारी, पर उपकारी, सोया शौर्य जगाया ।  अजर अमर अविनाशी तुमने, प्राप्त किया निर्वाण ।। 11 २. चौरासी में घूम रहे हम,

Mahavir Swami

Shraddha Se Naman Kare Hum

श्रद्धा से नमन करें हम, तेरा अनुसरण करें हम । पल-पल में स्मरण करें हम, महावीर स्वामी ।। १. भौतिक सुख छोड़ सारे, संयम का पथ अपनाया, ममता के तोड़ धागे, आत्मा में ध्यान लगाया । जग को परिवार बनाया, तूं मैं का भेद मिटाया,  करुणा का रस बरसाया, महावीर स्वामी ।। २. भीषण उपसर्ग

Mahavir Swami

Bhagwan Tumhara Dhyan Dharu

भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं महावीर तुम्हारा ध्यान धरूं अन्तर-आत्मा का ज्ञान करूं १. हर सांस गीत बने मेरा, हर चरण जीत बने मेरा । आनन्द सुधा का पान करूं, भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं ।। २. मिटे निराशा का घेरा, हो सदा प्रफुल्लित मन मेरा । समता सरिता में स्नान करूं, भगवान

Mahavir Swami

Maya Mamta Moh Ka Mahan

(लय : उंची उंची दुनियां की दीवारें ) माया ममता मोह का महान बन्धन तोड़के जी तोड़ के हो महावीर, कैसे आप निकले घर छोड़के… २ रुखी सुखी रोटी भी तो हम से छुट नहीं सकती,  सड़ी गली इस वे चीजो से, काया रुठ नीं सकती।  कैसे पकवान छोड़े खाने के राज रसोड़े,  चले गये

Mahavir Swami

Run Jhum Baje Ghooghara

(लय : रुण झुन बाजे घुंघरा) रूण झुन बाजे घुंघरा कोई झीणी बाजे ताल रे-२ सोने की असवारी मांही-२ आवे प्रभु महावीर रे ………..जीओ-३ अन्तरा ए तो सिद्धार्थ रा लाडला, ए तो तीन लोक रा नाथ रे, जैन धर्म रे उपदेशां ने=२ फैलाया प्रभु वीर रे… .जीओ-३ ॥१॥ थांरा दर्शन करवा आया, ऐ तो देव

Mahavir Swami

Chandani Fiki Pad Jyave

(लय : सूरज बादल में छिप जा रे) चांदनी फीकी पड़ जावे, चमक तारां री उड़ जावे,  म्हारै महावीर र तेज सामने, सूरज शरमावे ॥चांदनी.. ॥ अन्तरा त्रिशला थारां लाडलाजी सिद्धार्थ रा लाल,  वीरजी-२..  गर्भ आवताँ रत्न बरसिया, दुनिया हुई निहाल । चांदनी….. ऐरावत चढ़ इन्द्र आविया, जन्म लेवता पाण, वीरजी-२.. पाण्डुशिला पर न्हावण करायो,

Mahavir Swami

Trishala To Jayodo In Duniya Me Jadu Kargyo

  (लय : नखरालो देवरीया भाभी पर जादू) त्रिशला रो जायोड़ो, इण दुनियां में जादू करग्यो जादू करग्यो ओ तो जादू करग्यो । त्रिशला रो जायोड़ो… अन्तरा चैत सुदी तेरस दिन, राजा सिद्धार्थ घर जायो ।- २ कुण्डलपुर में जन्म लियो है, घर घर आनन्द छायो ॥-२ राज घराने रो सूरजियो, इण दुनियाँ में जादू

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