Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Mahavir Swami

Ghunghroo Chham Chhama Chham

(लय : ढोला ढोल मजीरा बाजेरे) घुंघरु छम-छमा छम छन ननननन बाजै रे,  त्रिशला नन्दन वीर प्रभु, म्हारे हिवड़े बिराजे रे ॥ कुन्डलपुर में जनम्या भगवन, घर घर मंगलाचार,  देव देवियां मंगल गावे, प्रभु लियो अवतार. ……. घुंघरु ॥१ ॥ त्रिशला नन्दन मंगलकारी, मंगल प्रभु रो नाम,  वीर प्रभु रो ध्यान धरो, सब मिलकर आठों […]

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Bahut Dhyan Dharte Hai

(लय : बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम) बहुत ध्यान धरते हैं महावीर का हम  नाम चाहे ले लो-२ जितना भी कम ऽऽ ।  बहुत ध्यान धरते है महावीर का हम ॥ १. लाखों की नैया को तुमने ही तारी नाम तुम्हारा मंगलकारी, करुणा के सागर-२ प्यासे हैं हम ऽऽ ।  बहुत ध्यान धरते है

Mahavir Swami

Kundalpur Wale

कुंडलपुर वाले तुमको जपुं मैं आदूँ याम।  त्रिशला के लाले चरणों में कोटि प्रणाम। अंतरा १. अखिल निरंजन, भव भय भंजन त्रिशला नंदन,  कलुष निकंदन, मैं रज कण, तूं मस्तक चंदन,  तूं ही तो मेरा तीर्थ धाम ॥ महावीरा… २. अष्ट कर्म के हो तुम हंता, दर्शन ज्ञान चरित्र अनंता,  मैं निर्बल तूं, अति बलवंता,

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Prabhuji Mhane Le Chalo

(लय : मोरियो आच्छो बोल्यो-३) प्रभुजी म्हांने ले चालो, थारां देश में,  प्रभुजी थांर देशा में, सुख दुःख ना मिले-३ ओ तो जन्म मरण मिट जाय, प्रभुजी म्हांने… स्थायी अन्तरा प्रभुजी लाख चौरासी, भटक्यो ना मिले-२ पायो मिनख जमारो म्हे तो आज, प्रभुजी…. म्हांने… ॥१ ॥ प्रभुजी निरख्यो ओ मुखड़ो, पूनम चाँद सो-२ थाँरी आवे

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Jis Bhajan Me Veer Ka Nam N Ho

(लय : यदि भला किसी का कर न) जिस भजन में वीर का नाम न हो। उस भजन को गाना ना चाहिये ॥  जिस जगह पे अपना मान न हो। उस जगह पे जाना ना चाहिये ॥ चाहे बेटा कितना प्यारा हो। उसे सर पे चढ़ाना ना चाहिऐ ॥ चाहे बेटी कितनी लाड़ली हो। आजाद

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Manava Ho Manava Veer Prabhu Ka

(लय : मांई न मांई) मनवा हो मनवा वीर प्रभु का नाम सदा सुखकारी।  जो भी जपता पार उतरता नाम सदा जयकारी ॥  जय जय वीर जय महावीर ॥ १. अपनी किस्मत बहुत बड़ी है वीर प्रभु को पाया। भाग्योदय से पुण्य फले हैं पाई शीतल छाया।  चरणों में जो भी आया है, है उसकी

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Jiski Aaj Jarurat Usne

(लय : मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर…) जिसकी आज जरूरत उसने क्यों पहले अवतार लिया ? मंद चांदनी चंदा की क्यों सूरज को उपहार दिया ? जिसकी आज १. तुम आये तब इस धरती ने अपना रूप संवारा था, मनुज-एकता की वाणी से उसको मिला सहारा था,  मानव अपना भाग्य विधाता पौरुष को आभार दिया। जिसकी आज

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Kabhi Veer Banke

कभी वीर बनके, महावीर बनके लय : कभी दुर्गा बनके… कभी वीर बनके, महावीर बनके, चले आना, दरश मोहे दे जाना-२ ॥ध्रुव॥ १. तुम ऋषभरूप में आना-२, तुम अजितरूप में आना-२, संभवनाथ बनके, अभिनन्दन बनके, चले आना, दरश मोहे दे जाना-२॥ २. तुम सुमति रूप में आना-२, तुम पद्म रूप में आना-२, सुपार्श्व बनके, चन्द्र

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Mahavir Ji O Mahavir

महावीरजी ओ महावीर? लय : उमरांव थांरी बोली महावीर ! थांरा दरसण कर सुख पावां म्हारा स्वाम। महावीर ! थारे चरणां में लुल ज्यावां म्हारा स्वाम ॥ महावीरजी ओ महावीर ! १. मां त्रिशला रा लाडला, सिद्धारथ कुल नन्द,  अन्तिम तीर्थंकर बण्या, छायो जग आनन्द ।  महावीर ! थारी महिमा कांई बतलावा म्हारा स्वाम-महावीरजी… २.

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Mhare Aangane Aaya Mat Jao Mahavir

(लय : म्हाने रमता न काजन टीकी लाद्यो. (मारवाड़ी) म्हारे आंगण आया, मत जावो महावीर, आंसूड़ा ढलकावे, म्हारी आंखड़ली-२-:  १. चम्पा लुट गयी मैं बिक्योड़ी, पग बन्धन बन्धियोड़ा,  म्हारी कौन सुणेला, दुनिया मांय महावीर ॥ आंसूड़ा… ॥२. मात पिता सब सखियां छूटी छुट्यो सब परिवार,  थे तो दुखिया ने मत, ठुकरावो महावीर ॥आंसूड़ा… ॥३. आप

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