Mahapragy Abhivandana (Kavita)
महाप्रज्ञ के अभिनन्दन में क्या उपहार चढाऊं तन -मन-जीवन किया समर्पित, सत-संस्कार जगाऊं कालू कर से तुमने पाई, संयम सुर तरू छाया तुलसी के चरणों में तुमने ज्ञान सुधारस पाया जीवन की वे स्वर्णिम, घड़ियां मैं कैसे बतलाऊं सृजनशीलता अनुपम, अदभुत, काम कमाल किया है संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी का साहित्य विशाल किया है महाप्रज्ञ की […]