Aao Hum Aaj Kare Tapsya Ka Abhinandan
(तर्ज : होठों को छू लो तुम) आओ हम आज करें, तपस्या का अभिनन्दन । तप ज्वाला में तपकर काया बनती कुन्दन ॥ ध्रुव ॥ अठाई तप करना, आसान नहीं कोई। तप धारा में बहना, आसान नहीं कोई। तन मन की मजबूती, से शोभे तप आसन ॥१ ॥ मुक्ति की राहों मेंतपबहुत जरुरी है, अध्यात्म […]