Tapsya Geet

Bhachya, Tapsya Geet

Ghor Tapsi Ki Dhal

(तर्ज और रंग दे रे..) घोर तपस्वी मुनि श्री सुखलालजी घोर तपसी हो मुनि घोर तपसी, थारो नाम उठ-उठ जन भोर जपसीजी।  घोर तपसी हो ‘सुख’ घोर तपसी, थारो जाप जप्यां करमां ही कोड़ खपसी ।। दो सौ बरसां ही भारी ख्यात है बणी, थांरो नाम मोटा तपस्यां रेसाथ फबसी।  ओअनशन आ सहज समता, लाखों […]

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Ro Melo Mandyo In Nagari Me

(तर्ज : रुणझुणियो) तपस्या रो मेलो मंडयो इण नगरी में। छाई है अजब बहार, मोद मनाओ जी ॥ १. सावणियै में रिमझिम मेहड़लो बरसै, त्यूं तप री झड़ी सुहाय ॥ २. तप री करणी मोटी विरला कर पावै । हिम्मत स्यूं बेड़ो पार ॥ ३. तप रै झीणै मारग वीर पुरुष चालै । कायर दिल

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Tap Ka Jab Deep Jale

(तर्ज: मेरे गीत अमर कर दो) जीवन का शुभ अवसर, तप ज्योति जलाई है। तप की महिमा गाते, कलियां विकसाई है ॥ १. तप कठिन साधना है हर एक न कर पाता।  आगम में गाई है जिसकी गौरव गाथा।  कितनों ने तप करके महिमा महकाई है ॥ २. जब भूख सताती है मन चंचल हो

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Mahavir Re Shasan Ri Mahima Mahkava,

(तर्ज : स्वामी भीखणजी रो नाम) महावीर रै शासण री, महिमा महकावां । स्वामी भीखणजी रै संघ री, गुण गाथा गावां ।। आओ तपस्या री गंगा में, संयम साबुन स्यूं आ आतमां री, चादर धोवां ।। १. तप की गरमी तेज बढ़ावै, तन मन का सब रोग मिटावै । शासन माता रा सब आओ, मिलजुल

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Tapsya Nirali Re,

तपस्या निराली रे तपस्या निराली रे देखो, चमके है तपसी रो दीदार । संयम री  शक्ति तपस्या निराली , रे। देखो खुल जावे सुरगां रा भी द्वार, मिट जावे जन्मा रा विकार संयम री शक्ति तपस्या निराली रे ।। १. करड़ो काम तपस्या रो, विरला ही कोई कर पावै, नाम सुण्या ही जीवड़ो कांपै, धड़कन

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Tap Su Atma Me Bhari Bal Aave,

तप स्यूं आतमा में भारी बळ आवै, कचरो करमा रो पल भर में जळ ज्यावै, कंचन वरणी होवै काया, रोग-दोख खनै आंतां ही घबरावै ॥ स्थायी ॥ कोरी बातां करणी सोरी, मन री तिषणा, तजणी दोरी, उर में ऊंदरा कूदै जद धीरज ढह ज्यावै-तप स्यूं…..॥1॥ इन्द्रयां चंचळ नाच नचावै, बड़ां – बड़ां रो रोब गमावै,

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Tap Ro Tyohar Manaoji,

(लय-ओ म्हांरा गुरुदेव)  तप रो त्योहार मनावोजी, नस-नस में जोश जगावोजी ॥ स्थायी ॥ जो तपरी ज्योत जलावै, वो अजर अमर बण ज्यावै । थे समता श्रोत बहावो जी, ओ तपस्या रो रंग…. 111 || जो लेवै तप रो शरणो, बह ज्यावै अमृत झरणो। निज घर में मौज उड़ावो जी, ओ तपस्या रो रंग….112 ||

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So So Sadhuvad Unhi Ko Tap Se Shakti Jagayi

(तर्ज. माईनी माई मुंडेर पे) आज हमारे मन आंगन में देखो खुशीया छायी , सौ सौ साधुवाद उन्हीं को तप से शक्ति जगाई 1 भिक्षु शासन की बगिया में तप का फूल खिला है, बडे भाग्य से ऐसा नन्दन वन गण हमें मिलाहै  इस उपवन की-2 ठंडी लहरे चले पवन पुरवाई , सौ-सौ– 2 तप

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Koi Khel Nahi Hai Karna Tap Aradhana,

(तर्ज: कब तक चुप बैठे,) कोई खेल नही है, करना तप-आराधना  तन-मन रसना को वश  करना, और साधना, 4-2  जो साधे, निश्चित पाता मुक्त्ती धाम ना,  सुख साधना- आराधना। तपस्वी तेरी हिम्‌मत, बेजोड़ अनोखी निराली ,जिन-शासन को चमकाया  गुरु किरपा पक्की जिसकी    है धारना, सुख साधना, आराधना  श्रीसंघ की शान बढाई, परिवार में खुशीया

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Melo Tapsya Ro

मेलो तपस्या रो (तर्ज : धरती धोरां री) मेळो तपस्या रो, मेळो तपस्या रो, मेळलो तपस्यो रो ।। ध्रुव ।। ओ तो दरियो ज्यूं लहरावै-२, देखण लोग हजारां आवै, सागै साध्यां ने भी ल्यावै ।।१ ।। इण स्यूं मिलै प्रेरणा भारी-२, मिलजुल आवै सब नर-नारी, कैसी खिली धर्म फुलवारी ।।२।। बिना बुलायां सगळा आवै-२, मन

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