Tradition (परम्परा)

Jain Bhajan

Mahamantra Navkar Sumiran

महामंत्र नवकार, सुमिरण नित्य करोजी, नित्य करो। जैनागम का सार, प्रातः ध्यान धरोजी, ध्यान धरो। १. श्रावक का आचार, पहला बतलाया जी, बतलाया। शुभ मन जपते जाप, मुक्ति-पद पाया जी, पद पाया। २. है स्वार्थ भरा संसार, कोई नहीं अपना जी, नहीं अपना। सुख-दुःख में आधार, नव पद है शरणाजी, है शरणा॥ ३. ले शरण […]

Jain Bhajan

Japlo Shree Navkar

(लय- मिलो न तुमतो) तन्मय होकर, मन को धोकर, जपलो श्री नवकार।  णमो अरिहंताणं, णमो श्री सिद्धाणं,  सब दुख हर्ता, मंगल कर्ता, महामंत्र नवकार।  णमो अरिहंताणं णमो श्री सिद्धाणं ॥ ध्रुव ॥१.  मोह को जिन्होंने मारा, अरिहंत देव विश्वाधार है।  अष्ट कर्म नष्ट किए, सिद्ध प्रभु अपुनरवतार है।  अशरण शरणं, भव भय हरणं परमात्मा अविकार

Jain Bhajan

Gaye Sab Milkar Gaye

गायें सब मिल गायें (लय : बच्चे मन के सच्चे) गायें सब मिल गायें, अहँ का ध्यान लगायें।  महामंत्र नवकार जपें, मन तन्मय ये बन जाये ॥  ओम् णमो अरिहंताणं, ओम् णमो श्री सिद्धाणं।ओम् णमो आयरियाणं ओम नमो उवज्झायाणं ओम्  नमो सव्व साहूणं के चरणों मे,   अपना शीश नमाएं ॥ … गायें २. एसो पंचणमुक्कारो,

Jain Bhajan

Om Ka Anup Roop

मंत्र नवकार है (लय : चुप-चुप खड़े हो……….) ॐ का अनूप रूप मंत्र नवकार है,  सर्व सिद्धिदायक जपो मंत्र नवकार है – २ १. णमो अरिहंताणं पद यह महान है,  सर्व सिद्धियों का मंगल प्रधान है।  मंत्राधिराज वीतरागता साकार है। सर्व सिद्धिदायक २. णमो सिद्धाणं अद्वितीय मंत्र है,  सच्ची उपासना से बनता स्वतंत्र है,  विघ्न

Jain Bhajan

Shraddha Vinay Samet

(लय : धर्म की जय हो) श्रद्धा विनय समेत, णमो अरहंताणं ।  प्रांजल-प्रणत-सचेत, णमो अरहन्ताणं ॥ ध्रुव ॥ आध्यात्मिक-पथ केअधिनेता।  वीतराग प्रभु विश्व विजेता।  शरच्चन्द्र सम श्वेत, णमो अरहन्ताणं ॥ ध्रुव ॥१ ॥ अक्षय, अरुज अनन्त अचल जो।  अटल, अरूप-स्वरूप जो,  अजरामर अद्वैत, णमो श्री सिद्धाणं ॥ ध्रुव ॥ २ ॥ । धर्म-संघ के जो

Jain Bhajan, Tapsya Geet

Sur Se Sunau Sargam Se Sunau

सुर से सुनाऊं, सरगम से सुनाऊं जन-2 को सुनाऊं, तन मन से सुनाऊँ सबको, महिमा वीर नाम की-2 ओ महिमा वीर नाम की 1. ओ आदिनाथ भगवान जिनका पालीतना है धाम-2 उन आदिनाथ भगवान की मेरा बारम्वार प्रणाम-2 सुर से सुनाऊँ…. 2. ओ वासुपूज्य भगवान जिनका चम्पापुर है धाम-2 उन वासुपूज्य भगवान को मेरा बारम्बार

Gyanshala Geet, Jain Bhajan

Arham Arham Ki Vandana Fale Gyanshala Geet

अर्हम अर्हम  की वन्दना फले । जीवन विकास हो, मन में सुवास हो, देखो दीपक से दीपक जले । विद्या के पावन मंदिर में सच्ची शिक्षा हम पाएं, सदाचार के सुन्दर पथ पर कदम-कदम बढ़ते जाएं । चाहे रात या प्रभात हो भले ।। : हम सारे हैं भाई-भाई भ्रातृभाव से सदा बढ़ें, अपना संयम

Jain Bhajan

Matbhedo Ki Tod Diware

मतभेदों की तोड़ दीवारें आर्हत वाणी प्राण हमारा, हम इसका सम्मान करें। अपना जीवन बलिदान करें, सब मिल जुल नव्र अभियान करें।॥ -. महावीर तीर्थकर ही हम सबके भाग्य विधाता ‘है। महामंत्र नवकार हमारे जीवन का निर्माता है। फिर क्यों दूरी रहे परस्पर युग हमको आह्वान करे ॥ 2. जिन शाासन की प्रभावना में दूरी

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya,

पर्युषण पर्व आया, इन्तजार करते करते।  श्रद्धा का रंग लाया, उत्साह भरते भरते ॥ १. अनमोल है यह अवसर, अब धर्म साधना का।  उड़ जाए मोह निद्रा, नवकार जपते जपते ॥ २. सामायिकें तपस्या, स्वाध्याय लीनता हो।  आत्मा में हो सरलता, जिनवाणी सुनते सुनते ॥ ३. मौसम सुहावना है, हर दिल में जोश जागे।  निपजाओ

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Ke Anupam Deep Jale

मैत्री के अनुपम दीप जले, पर्युषण पर्व सुहाना है। श्रद्धा के सुरभित सुमन खिले, पर्युषण पर्व सुहाना है। १. मुश्किल से मानव जन्म मिला। जिन शासन पा सौभाग्य खिला। तप जप करने वे क्षण उजले ॥ २. माला जपने मन टिका नहीं। ना सामायिक स्वाध्याय कहीं। अवसर है आराधन कर लें ॥ ३. ये बीत

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