Tradition (परम्परा)

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Hariday Me Ullas Bhar Raha

पर्व पर्युषण हृदय उल्लास भर रहा। जागरण का जागरण का, अनवरत आह्वान कर रहा। २. जन्म मृत्यु अनन्त अब तक हो गए चेतन । और होते ही रहेंगे, ज्ञान कर चेतन ! मोह का मोह का, है उदय जिससे चक्र चल रहा ॥ २. कर्म फल भुगतान करते अन्त कुछ आया। उच्च कुल में पुण्य […]

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Yah Parv Mahan,

(तर्ज : मेहंदी रची थारै) पर्युषण यह पर्व महान्, करते हम दिल से सम्मान।  छाई अजब बहार हो, हर घर घर में। १. चौरासी के चक्कर में, हम सबने जन्म किए कितने ।  जन्म मरण की परम्परा में, सहन वेदना की हमने।  अब तो मिला किनारा है, श्री जिन धर्म सहारा है।  जीवन की पतवार

Jain Bhajan, Terapanth

Mahima Shasan Ri

(तर्ज: धरती धोरां री) महिमा शासण री… भैक्षव गण री गरिमा भारी।  जागी भाग्य दशा आपांरी।  फूली फूलां स्यूं फुलवारी ॥ १. तुलसी उपवन नै जीणै रो विज्ञान सरसायो।  सिखायो । पार समन्दर जश फहरायो ॥ २. जो भी मर्यादा में चालै।  गुरुवर हाथ पकड़ कर झाले।  पग पग सारा संकट टालै ॥ ३. विनयी

Jain Bhajan

Shasan Mila Prabhu Ka

(लय- तुझे सुरज कहुँ या चंदा’) शासन मिला प्रभू का, सौभाग्य है हमारा, आराधना हो ऐसी, न जन्म ले दुबारा 1. रिश्ते अनन्त हमने, हर जीवन में बनायें, कोई जगह नही है ऐसी, जहाँ जन्म हम ना पाये, चारों गति भटकते, नही पा सके किनारा ।। 2. नरभव मिले थे पहले, उपयोग ना करपाये,  सम्यक्त्व

Jain Bhajan

Sanyam Chalisa, jain Bhajan

संयम चालीसा’ मन में संयम तन में संयम, और वचन में भी हो संयम सांस सांस में संयम-संयम, जिन शासन है संयम-संयम 1. छह काय का रक्षक संयम, है पापों का तक्षक संयम तीर्थकर की ऊर्जा संयम, महाव्रतों की पूजा संयम -2 2. संयम से अरिहंत बने हैं, सिद्ध प्रभु जयवंत बने हैं, संत सती

Bhachya, Jain Bhajan, Tapsya Geet

Mahima Jain Dharm Ki,

सुर में गाऊं ,सरगम में गाऊं, गा गा के सुनाउ सबको-२ महिमा जैन धर्म  की ,सबको – २  आदिनाथ हैं, जिनका पालीताणा हैं उनका धाम नाम धाम ऐसे आदिनाथ को वंदन बारम्बार हैं। सुर– नेमिनाथ हैं, जिनका नाम गिरनार उनका द्याम  ऐसे नेमिनाथ को वंदन बारम्बार हैं। सुर– शान्तिनाथ हैं जिनका नाम हैं हस्तिनापुर हैउनका

Jain Bhajan

Michhami Dukkadam Geet, jain Bhjan

जो कुछ भी पाप हुआ तुमसे मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं, भगवान आपकी साक्षी से मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं  गुरु देव आपकी, साक्षीसेमिच्छामिदुक्कडंलेताहूं, अपनी आत्मा की साक्षी से मिच्छामि दुक्कडं लेता हूं  1.पंचाश्रव पाप अठारह का, जो सेवन किया कराया हो। इस भवमे या पिछले भवमे, मिच्छामि दुकक्डं लेता हूं  2.कर्मों के र्कता राग द्वैष,ये नाच

Jain Bhajan, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Chetan Lele Sharna Char

चेतन ले लै शरना चार, सांचों आरो ही आधार, सारो स्वार्थियो संसार,कोई थारो नही है। 1.श्री अरिहंत सिद्ध अणगार,सांचों धर्म हिय में धार ओ ही करंसी बेड़ा पार,और चारों नहीं है,। 2.जो तू होणो चावे न्याल,आं च्यारा रो पल्लों झाल थारे माथे उभो काल,कोई पतियारो नहीं है  3.जिला होकर रही सचेत,आं च्यारा स् यु राखी

Jain Bhajan

Bhavo Bhawna, Nirgun Geet

भावे-भावना-आचार्य तुलसी भावे भावना, मन मोद न मावे रे ।। मुगती रा मारग प्रभु च्यार बतावै रे तिण में भावना अग्रेस कहावै रे ॥ भावे — जो दान शील तप आदरणी नी आवे रे। तो आ एकली शिवपुर पहुँचावे रे… जो दान शील तप अघ बंध रुपाने रे। तिन में भावना रो सहारो चावे रे 

Dance, Deshbhakti, Marwari Lokgeet

Jay Jay Rajsthan

  जय जय राजस्थान / राजस्थानी गोरे धोरां री धरती रोपिचरंग पाणा री धरती रो , पीतल पातल री धरती रो, मीरा करमा री धरती रोकितरो कितरो रे करां म्हें बखाण, कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान …धर कुंचा भई धर मंजलांधर कुंचा भई धर मंजलांधर मंजलां भई धर मंजलांकोटा बूंदी भलो भरतपुर अलवर

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