Tradition (परम्परा)

Deshbhakti, Geet, Marwari Lokgeet, Rajasthani Dance

Bharat Mharo Desh Putharo Vesh

BHARAT MHAARO DESH FUTARO VESH  भारत म्हारो देश फूटरो वेश के धन- धन भारती,  बोलो जय जय कार उतारो आरती ,हो हो उतारो आरती —–  सोनो उगले धरती अम्बर ,मोतीड़ा बरसावे रे,  मुलके सूरज चाँद गीत कोयलड़ी मीठा गावे रे,  हिमगिरि योगी राज शीश पर ताज की गंगा वारती,  समदरिया री लहरा चरण पखारती (१) […]

Deshbhakti, Geet, Marwari Lokgeet, Rajasthani

VO Maharana Pratap Kahte

 VO MAHARANA PRATAP KATHE हल्दी घाटी में समर लड़यो, वो चेतक रो असवार कठे? मायड़ थारो वो पुत कठे?  वो एकलिंग दीवान कठे? वो मेवाड़ी सिरमौर कठे?  वो महाराणा प्रताप कठे?  1 मैं बाचों है इतिहासां में, मायड़ थे एड़ा पुत जण्या,  अन-बान लजायो नी थारो, रणधीरा वी सरदार बण्या, बेरीया रा वरसु बादिळा, सारा

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Neela Ghoda Ra Aswar

नीला घोड़ा रा असवार नीला घोड़ा रा असवार , म्हारा मेवाड़ी सरदार राणा —-सुणता ही जाज्योजी ,मेंवाडी राणा सुणता ही राज्यों जी  1 राणा थारी दकाल सुणनै अकबर धूज्यो जाय, हल्दी घाटी रंगी खून सूँ नाळो बहतो जाय, चाली मेवाड़ी तलवार ,बैग्या खूना रा खंगाळ ,राणा सुणता ही जाज्योजी—– 2 चेतक चढग्यो हाथी ऊपर मानसिंह

Dance, Deshbhakti, Geet, Marwari Lokgeet, Rajasthani

Kesriya Balam – Padharo Mhare Desh

KESRIYA BALAM केसरिया बालम आवोनी, पधारो म्हारे देश जी |    पियाँ प्यारी रा ढोला, आवोनी, पधारो म्हारे देश | आवण जावण कह गया, तो कर गया मोल अणेर | गिणताँ गिणताँ घिस गई, म्हारे आंगलियाँ री रेख || केसरिया बालम आवोनी, पधारो म्हारे देश  | साजन साजन मैं करूँ, तो साजन जीवजड़ी | साजन फूल

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Are Ghas Ri Roti (Patal & Peethal)

अरं घास री रोटी (Patal & Peetal) अरे घास री रोटी ही जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो ।नान्हो सो अमरंयो चीख पडयो रांणा रो सोयो दुंख जाग्यो । हूं लडंयो घणो हूं सहयो घणोमेवाडी मान बचावण न ,हूं पाछ नहीं राखी रण मंबेरया रो खून बहांवण मं , जद याद करूं हंळदी घाटी नेणा म

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Dharti Dhora Ri

   Dharti Dhora Ri धरती धोरां री ! आ तो सुरगां नै सरमावै, ईं पर देव रमण नै आवै, ईं रो जस नर नारी गावै, धरती धोरां री ! सूरज कण कण नै चमकावै, चन्दो इमरत रस बरसावै, तारा निछरावल कर ज्यावै, धरती धोरां री ! काळा बादलिया गहरावै, बिरखा घूघरिया घमकावै, बिजली डरती ओला खावै, धरती धोरां

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