Tradition (परम्परा)

Deshbhakti

Har Rang Hai Pyaro Bharat Ro

(लय – जहाँ डाल डाल पर सोने की) हर रंग है प्यारों भारत को पण ओ रंग सबसू  न्यारो  ओ मरुधर देश है म्हारो -2– इरी धजा उड़े गिगनारा, ओ म्हाने प्राणा स्यूभी प्यारो । -अठे धोरा री धरती रा टिंबा आबू पर्वत ऊं चो – 2  उद्‌यापुर झीला री नगरी हैं, अजब धाम रुणीचो-2 […]

Deshbhakti

Jaha Dal Dal Par Sone Ki Chidiya Karti Hai Basera

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़ियां करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा वो भारत देश है मेरा  जय भारती, जय भारती ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला (हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ, हरि ॐ) जहाँ हर बालक एक

Deshbhakti

Sone Ri Chidkali Re Mharo Pyaro Desdlo

सौने री चिड़कली रे, प्यारो म्हारो देसड़ो। अठै नर वीरां री खान जगत अगवाणी रै।। दूध दही री अठै नदियाँ बहती। रिध सिध साथै नव निध रहती।। होती अठै मोकळी गायां। रहती फळफूलां री छायां।। करसा अन्न घणो निपजाता। बांनैं देख देव हरसाता।। शस्य श्यामला रै भारत भोम है। ई रो अन्नपूर्णा रूप, दुनियां जाणी

Adhyatmik, Jain Bhajan, Nirgun, Satsang

Man Ko Shant Banaye Hum

सास सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम इसे जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनों को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम बन जाए हम  मन को शान्त बनाये हम कि मनको – 2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाएं 2 

Gyanshala, Jain Bhajan

Naya Savera Aaya (bacho Ke Liye)

(तर्ज – लकड़ी की काठी) नया सवेरा  आया नई रोशनी लाया।  हीरे जैसा मानव जीवन पुण्योदय :से पाया ।। भेदभाव को भूलो, समता, रस में फूलों ।  परमात्मा को पानी है तो संतो के पद छूलो ।। झुक झुक-२ ऊँचा निज आचार हो प्रेम भरा व्यवहार  हो । . एक बनों और नेक बनों सबमे

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya Hai

पर्युषण पर्व आया है, अनोखा रंग, छायाा है   आत्म चिंतन    आत्म उत्थान  का संदेश लाया है। ① सु सौरस फैली है तप की ये देखोआज कण कण में दैष को धो दिया मनसे  समता स्रोत बहाया है ② ये पावन पर्व आया हूँ लेकर इक नया सन्देश  जगाले आत्म शक्ति को मिटाले क्षीणता मन

Jain Bhajan

Pyaro Pyaro Lage Navkar

प्यारो प्यारो लागेनवकार हिवड़े में म्हारे बसग्यो म्हारे बसग्यो, म्हारे बसग्यो  मंत्र घणो उपकारी ओ है गुण रो एक खजा‌नो हो-2  दोरी बेला  आडो आवे पांच पदा रो शरणो हो  चोखो चोखो लागे नवकार  हिवड़ में म्हारे बसग्यो  मन पंछी न काबू   राखण समता दोष लेखेरे आहामत्र री माला सुख वालोतो तिरज्याचे अलिो. भालो नागिनवकार

Jain Bhajan

BhavSagar Par Lagata Hai Mahamantra Navkar Jain

महामंत्र नवकार (लय- कैसी वह कोमल काया रे)  भव सागर पार लगाता  है, महामंत्र नवकार । बिगड़े सब काम बनाता है महामंत्र  नवकार ।।  हर पल यह मंगल करता सारी दुविधायें हरता  भय मन से दूर भगाता है,  महामंत्र नवकार  यह मंत्र बड़ा उपकारी, पूरी हो इच्छा सारी ।  यह सोये भाग्य जगाता है। महामंत्र

Jain Bhajan

Sans Sans Me Rahe Ninadit Mahamantra Navkar

(बार-2 तोहे क्या समझाऊं) सांस सांस में रहे निनादित महामंत्र नवकार  ले-ले सहारा हो जाए बेड़ा पार ।। महामंत्र नवकार हृदय का अमृत है।  एक-2 अक्षर ऊर्जा से संमप्रक्त है।  जपे जाप तो खपे पाप यह लोकोत्तर उपहार । पूज्य स्मरण से पजो करता, दिनकी शुरुआत  उदिता मुदिता शुचिता की होती बरसात !!  मन प्राणों

Jain Bhajan

Shudh Man Navkar Japlo

(लय – भाव भीनी वंदना) शुद्ध मन नवकार जप लो, है सदा कल्याणकारी ।  डूबती मझधार नैया, पार कितनों की उतारी।।. ① एक आस्था हो ह्रदय में, एक स्वर हो एक लय में। पंच परमेष्ठी का स्मरण कर, जिन्द‌गी जिसने निखारी॥ ② मंत्रबल से नाग काला, काला,  बन गई थी फूलमाला। नाचती थी मौत लेकिन,

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