Tradition (परम्परा)

Jain Bhajan

Likh Dyo Mhare Rom Rom Me

*(लय- चांद चढ़‌यो गिगनार ) लिख दयो म्हारे रोम-रोम में लिख द‌यो म्हारे रोम रोम में अरिहंता रो नाम प्रभु-2  लिख दयो म्हारे रोम रोम में शीश पर म्हार रिषभ नाथ जी ,माथे अजित प्रभु रो नाम काना म्हारे संभव लिख दयो, आंख्यामें अभिनन्दन नाम-2 नाक पर प्रभु सुमति लिखदयो, होटा पदम प्रभुरो नाम -2 […]

Jain Bhajan, Santhara

Lagi Lagi Nav Kinare Ab Lagi Ho

लागी लागी नाव किनारे तर्ज : तेजा रे…. लागी लागी नाव किनारे अब लागी हो। जनम सुधार्यो थे तो सांतरो। । ध्रुव ।। कुण बेटो कुण बाप जगत में, सारी सुपने री माया। ममता मत करज्यो नश्वर देह री।।१ ।। बड़ो कठिन है मन नै दमणो, खमणो और खमाणो हो। गांठां मत रखज्यो मन में

Jain Bhajan

Prat Uth Parmeshti Vandan Karu Sada Nishkam- (Somlataji)

प्रातः स्मरणीय गीत रचयिता शासन श्री साध्वी सोमलता जी  लयः कितना बदल गया प्रातः उठ परमेष्ठी वंदन करूं सदा निष्काम  शांति रहेगी आठों याम ।। सदा।। ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म प्रभु पाप निकंदन।  नाथ सुपार्श्व चंद्रप्रभु सुविधि, शीतल प्रभु से चाहूं सिध्यि। समरूं नित श्रेयांसदेव अरू वासुपूज्य अभिराम 11111 विमल अनंत धर्म सुखकारी,

Jain Bhajan

Chhod Diya Ghar Bar Nemji

छोड़ दिया घर बार नेमजी (तर्ज : चांदी की दीवार) छोड दिया घर बार नेमजी, सुख वैभव को छोड़ दिया. संयम पथ को धार नेमजी, भव सागर को पार किया ।। १. आयो तो थे ब्याह रचनाने, छाई हुई थी खुशहाली, तीन लोक के जानने वाले, देखी वहां घटा काली,  लाखों पशु बिलखते रोते, मौत

Jain Bhajan

Mat Jao Nem Kumar

मत जाओ नेम कुमार तर्ज : कर सोला सिणगार, चाली पाणी ने पणिहार…. मित्र – मंडल – कोलकाता मत जाओ नेम कुमार, राजुल रो रो करे पुकार-२ ।।ध्रुव ।। उभी झरोखे राजुल सोचे, छोड़ चाल्या बारात, क्यूं थे छोड़ चल्या बारात ।। रथ ने फेर चल्या थे स्वामी, रे गई मन री बात,  म्हारी रे

Jain Bhajan

Simandhar Bhagwan

सीमंधर भगवान जी मैं चरणां शीश नमाऊं, जी मैं दर्शन किण विध पाऊं। जी म्हारी वीनतड़ी अवधारो, जो मोहे तारो पार उतारो। जी संसार लगै छै खारो, जी वैराग्य लगै छै प्यारो। जी म्हारा आवागमन निवारो, जी सीमंधर भगवान ।।  सीमंधर प्रभुजी नै प्रणमुं, चरणा शीश नमाय,  आप तणां गुण मुख स्यूं गायां, म्हारा भव-भव

Jain Bhajan

Piya Girnar Na Jao

पिया गिरनार ना जाओ (तर्ज : कर सोला सिणगार, चाली पाणी ने पणिहार….)  पिया गिरनार ना जाओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हें राजुल…। मुझे ना छोड़कर जाओ, तुम्हें राजुल बुलाती है, तुम्हे राजुल…।। ध्रुव ।। पिया लौटा के रथ अपना, क्यूं मेरे दिल को तोड़ा है,  तुम्हें करुणा जो प्यारी है, मुझे रोती क्यों छोड़ा

Jain Bhajan

Goutam Gandhar Bade Mahan

गौतम गणधर बड़े महान (लय : रघुपति राघव राजाराम) रचयिता : साध्वी राजीमतीजी गौतम गणधर बड़े महान, रिद्धि-सिद्धि का देते दान। जिनके जप से नवों निधान, मिलता सच्चा आत्मिक ज्ञान।। ध्रुव।। 1. महावीर के शिष्य बड़े, करते घन्टों ध्यान खड़े।  बिना सहारे शिखर चढ़े, बन गये ज्ञानी बिना पढ़ें ।। 2. गौतम जप से मिटते

Jain Bhajan, Paryushan

Man Ne Saf Rakhije (khamat Khamna)

मन ने साफ राखीजै (तर्ज : माता वदनाजी रो लाडली……….) -साध्वी श्रीराजीमतीजी रे चेतन! जीणो है दिन च्यार, मन नै साफ राखीजै। रे मनवा! पापां रो ओ भार, सिर पर मतना बांधीजै ।। 1. मन नै साफ राखणियां तो कोई-कोई है।  मैली वृत्त्यां पर नियंत्रण, पूरी-पूरो राखीजै। 2. मन है चंदन-बाग, मन है काटां री

Jain Bhajan

Rakho Hirade Me Mangal Vitrag Bhawna.,&. Om Mangalam

(लय : चमकै दुनिया में) मंगल वीतराग भावना राखो हिरदै में मंगल वीतराग भावना, अपणो कल्याण करसी अपणी साधना, मंगल वीतराग भावना ।। जागै भीतर में शक्ति वर्धमान ज्यू, भक्ति हनुमान ज्यू, विरक्ति भरत महान ज्यू, मुक्ति जम्बू प्रधान ज्यू,  मंगल वीतराग भावना ।। १. रिषभ अजित संभव अभिनन्दन, सुमति पदम सुखकारी है, श्री सुपार्श्व

Scroll to Top