Tradition (परम्परा)

Jain Bhajan

He Vitrag Bhawa Paar Karo

(लय : महावीर मुझे ज्योतित करदो…) * वीतराग ! भव पार करो हे वीतराग ! भव पार करो । कण-कण में समता भाव भरो ।। १. श्री ऋषभ, अजित, संभव स्वामी, है अभिनन्दन अन्तर्यामी । जिन सुमति, पद्म, सुपार्श्व स्मरो,  हे वीतराग। भव पार करो ।। २. श्री चन्द्र, सुविधि, शीतल सुखकर, श्रेयांस, वासुजिन, विमल […]

Bhachya, Jain Bhajan

Chandan Bala

चन्दनवाला की ढाल (लय : जिया बेकरार है..) जिया बेकरार है, हृदय की पुकार है। आ जाओ महावीर प्रभु, तेरा इंतजार है।। ध्रुव ।। राजकन्या है दधिवाहन की, महलो की मतिहारी हो।  तीन दिवस से पड़ी अकेली, कर्मों की गति भारी हो।  कोई न पूछनहार है, नहीं किसी से  प्यार है ।।१ ।।  हाथ पांव

Jain Bhajan

Tirthankar Chobis Nit Uth Dhyan Dharu Ji Dhyan Dharu

मंगल स्तुति (लय : चांद चढ्यो गिगनार) तीर्थंकर चौबीस तीर्थंकर चौबीस नित उठ ध्यान धरूं जी, ध्यान धरूं । मंगलमय जगदीश, महिमा गान करूं जी, गान करूं ।। १. रिषभ, अजित भगवान संभव सुखकारी जी, सुखकारी । अभिनंदन जग त्राण, सुमति जयकारी जी, जयकारी ।। २. पद्म सुपारसनाथ, चंदन चंद्रप्रभु जी, चंद्र प्रभु । सुविधि,

Jain Bhajan, Santhara

Samyag Gyani Samyag Darshi (संथारा)

निर्वाण का मार्ग (तर्ज कितना बदल गया इन्सान) सम्यग ज्ञानी, सम्यग दर्शी, सम्यग् संयमवान,  उसी को मिलता है निर्वाण। शास्त्र शास्त्र में, स्थान स्थान पर बोल गए भगवान, उसी को मिलता है निर्वाण । टेर।। जीव तत्व हूं, जड़ से निराला, पुण्य शुभ है पाप है काला। संवर बाध है, आश्रव नाला, बंध बंध निर्जरा

Jain Bhajan

Bhor Bhor Uth Kar Prabhu Ne Sumirle

मंगल स्तुति (लय : बादळियो..) रचयिता : साध्वी जतनकुमारीजी भोर-भोर उठ कर प्रभू भोर-भोर उठ ‘कर प्रभू नै सुमरलै भव-जल तूं तर ज्यावैला ओ , मनवा ।  प्रभू नाम च्यांनणिये स्यूं आंगणियै नै भरलै,  अंधियारो मिट ज्यावैला, ओ मनवा ।। १. ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन है,  सुमति, पद्म, सुपार्श्व जग वंदन बंधनहै  सब कट ज्यावैला,

Jain Bhajan, Paryushan

Atma Ki Pothi Padhne Ka Yah Sunder Avasar Aaya Hai

पर्युषण गीत सान्निध्य-समणी निर्देशिका डॉ निर्वाणप्रज्ञा आत्मा की पोथी पढ़ने का यह सुंदर अवसर आया है । सोपान यही है चढने का मस्तिष्क मनुज का पाया है। संवत्सर का संदेश सुने निर्मल मन निर्मल काया है। 1. जीवन की पोथी के पहले, पन्ने में मैत्री मंत्र लिखो सिर दर्द समूल मिटाने का यह सुंदर अवसर

Jain Bhajan, Paryushan

Aayo Jain Jagat Ro Pramukh Parv Samvatsari Re (paryushan)

महापर्व – संगान (लय- माता सीता की गोदी में हनुमत डाली मूदंडी) आयो जैन-जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी रे ।  छायो सकल संघ में रंग, धर्म-जड़ हरी भरी रे ।। पर्यूषण पर्व नाम कहायो, भाद्रव महिनो सदा सुहायो, नियमित धवल पक्ष निरमायो, प्रायः पांचम रो दिन पायो । आयो जैन जगत रो प्रमुख पर्व संवत्सरी

Jain Bhajan, Paryushan

Parv Paryushan Aaya

पर्युषण पर्व  (लय-कजरा मोहब्बत वाला) महावीर ने पथ दिखलाया, पर्व पर्युषण आया  जैनियों की है पहचान, करने कमाई धर्मध्यान   समता के  फूल खिले है, अन्तर्मन दीप जले है   रोशन है सारा जहान, करले कमाई धर्म ध्यान  महावीर ने पथ दिखलाया—-  सत्य अहिंसा करुणा जीवन में हम अपनाये -2  सद्‌गुण मुक्ता को अपने खेतो में

Jain Bhajan, Paryushan

Chadariya Nai Rangayi Hai (khamat Khamna Geet) (paryushan)

खमत-खामणा गीत (तर्ज : तावड़ो धीमो पड़ज्या रे….) – साध्वी श्री राजीमतीजी चदरिया नयी रंगाई है-२ यदि रागद्वेष रो दाग लागग्यो, क्षमा सफाई है।चदरिया नयी रंगाई है-२  1. हाथ जोड़ सगलां स्यूं म्हांरा, खमत खामणा है।  बिना खमायां गति बिगड़ै, आसूत्र-धारणा है।  समाई खरी कमाई है। कि समता खरी कमाई है। 2. खमत खामणा मनस्यूं

Jain Bhajan, Paryushan

Maitri Diwas Manaye Hum (paryushan)

मैत्री दिवस मनायें हम (लय-धीरे धीरे बोल…) मैत्री दिवस मनायें हम, मन को विमल बनायें हम । सरल हृदय बन जायें हम, सबसे आज खमायें हम । हम ग्रंथियों को खोल लें, रूठों से हंसकर बोल लें ।। ।। भूलों का पुतला होता इन्सान । हंसता रोता करता है तूफान । नादान भी, गुणवान भी,

Scroll to Top