Tradition (परम्परा)

Jain Bhajan

Mangal Bhavna

मंगल भावना श्री सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं आभा – सम्पन्न बनूँ ही सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं लज्जा – सम्पन्न बनूँ धी सम्पन्नोऽहं स्याम् घृति सम्पन्नोऽहं स्याम् शक्ति सम्पन्नो ऽहं स्याम् शांति सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं बुद्धि – सम्पन्न बनूँ मैं धैर्य – सम्पन्न बनूँ मैं शक्ति – सम्पन्न बनूँ मैं शांति – सम्पन्न बनूँ नन्दी सम्पन्नोऽहं स्याम् मैं […]

Jain Bhajan

Chidanand Roopam Namo Vitragam

वीतराग वंदना (मंगला चरण) ① शिव शुद्ध बुद्धं परम विश्व नाथं  न देवन बन्धू न कर्माणि कर्ता  न अंगं न संगं न इच्छा न कामं,  चिदानंद रूपं नमो वीतरागं  ②न बंधो न मोक्षो न रागादि दोषं  न योगं न भोगं न व्याधि न शोकं न क्रोधं न मानं न माया न लोभं चिदानद रूपं– ③न

Jain Bhajan

Jhum Jhum Prabhu Ke Gun Gale

झूम – २प्रभु के गुण गाले,गुण गाले प्रभू गुण गाले भव बन्धन कट जायेगा जो शरण प्रभु की आयेगा हिल मिल्‌कर जिन मन्दिर आये आज  दर्शन पाये धन्य घड़ी धन्य भाग  हमबार  करे नमस्कार जो शुद्ध भावना भायेगा,  वो मन वांछित  फल पायेगा लोभ क्रोध को इस जीवन से त्याग  माया मम ता छोद द्वेष

Jain Bhajan

Jay Bolo Jay Bolo

तर्ज-सायोनारा (लव इन टोकियो। जय बोलो   जयबोलो, जैन धर्म कीजय बोलो  दुनिया के हर कोने से सब मिल करके जयबालो ये वो शीतल छाया  है नहीं जहाँ छल माया है,  सत्य अहिंसा और धरम जहाँ सभी को भाया हैं  जय बोलो… महावीर को ये वाणी सारी दुनिया नेजानी जीओ सबको जीने दो मत करना तुम

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Namo Arhantam Namo Bhagvantam

(लय- बाबो. अलबलो) नमो अरहन्तं नमोभंगवतं पार लगाए नौका नमो महामतं ① राग व द्वेष न जिसमे समता सुनाए।  एक ही घाट बकरी शेर आए जाए।  महिमा निराली प्रभु की नमो धैरयवन्तं ॥ ② कोईनभाऐ तुमको दिल में बिठाऊं    रात् दिवस क्या पल -२छिन-२धयाऊ  अपने बराबर करलो नमो सिद्धिवंत ॥ एक जनम क्या लाखों जन्म

Jain Bhajan, Paryushan

Koti Koti Kantho Se Gaye

क्षमा दिवस (मैत्री मंत्र) (तर्ज : कोटि कोटि कंठों से गाएं……) बड़े प्रेम से मिलजुल सीखें, मैत्री-मंत्र महान रे । औरों से ले क्षमा स्वयं, औरो को करे प्रदान रे ।। व्यक्ति – व्यक्ति में जाति-जाति में, वैमनस्य जो बढ़ता, प्रातं-प्रांत में राष्ट्र-राष्ट्र में, अन्तर जाता पड़ता । यह भारी, विश्व-शान्ति को खतरा, हो इसका

Jain Bhajan

Duniya Me Mantra Aneko Hai

दुनिया में मंत्र अनेको है नवकार मन्त्र का क्या कहना  इस महामंत्र का क्या कहना, नवकार मंत्र का– ① गणधर गौतम इसको जपते  साधु श्रावक इसमे जपते यह कामधेनु यह कल्प वृक्ष  इसकी महिमा का क्या कहना  ② प्रातः उठकर सब ध्यान घरे  पल-2 में इसको हम समरे  सब पाप ताप संताप ह रे इस

Jain Bhajan

Chod Diya Gharbar Nemaji

(लय : चांदी की दीवार न तोड़ी) छोड़ दिया घरबार नेमजी, सुखवैभव को छोड़ दिया, संयमपथ को धार नेमजी, भवसागर को पार किया ।। ध्रुव ॥ १. आये तो थे ब्याह रचाने, छाई हुई थी खुशियाली  तीन लोक के जानने वाले, देखी वहां घटा काली  लाखों पशु बिलखते रोते, मौत अभी आने वाली  उनकी करुण

Jain Bhajan

Shanti Jineshwar

शांति जिनेश्वर शांति करो लय : शान्ति करों सव विघ्न हरों ओम शांति जिनेश्वर शांति करो, शांति करो सब विघ्न हरो। घट घट में अभय पीयुष भरो ॥ ध्रुव ॥ १. तुझ नाम लिया दुःख द्वन्द मिटै, झट डाकिन भूत पिशाच हटे विष उतरै विषधर काले रो॥ २. दुष्काल मृगी अरु मरी टलै, भूचाल भयंकर

Jain Bhajan

Neminath

भगवान नेमिनाथ की बारात (लय : चांदी की दीवार) शादी करने आये नेमजी कांकड़ डोरा तोड़ दिया  तोरण पर आकर प्रभु ने रथ का मुखड़ा मोड़ दिया हाथी, घोड़े, रथ पैदल बारात बड़ी ही भारी थी  श्याम सलौने नेम कंवर की छवि बड़ी ही प्यारी थी  छप्पन कोड़ी आये बाराती यह तो सब से न्यारी

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