Tradition (परम्परा)

Jain Bhajan, Paryushan

Jaha Janam Janam Ke Ver Bhav Ka Hota Hai Nistara (Khamat Khamna)

पर्युषण प्यारा (लय : जहां डाल डाल पर….) जहां जनम जनम के वैर भाव का होता है निस्तारा। ये दिन संवत्सरी प्यारा-२ जहां प्राणी मात्र से प्रेम भाव का जो करता है इशारा ये पर्व पर्युषण प्यारा-२ जय शासनम् जिन शासनम् ।। ध्रुव ।। यहां कालचक्र की गति बनाई, नहीं अंत नहीं आदि’  घट बढ़ […]

Jain Bhajan, Paryushan

Barse Bhadudo Rim Jhim (paryushan Parv)

बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम (लय-अपने पिया की…) मिलजुल कर आज सारा पर्युषण मनावां । बरसै भादूड़ो रिमझिम रिमझिम । धर्म जगावा आवो पर्युषण मनावां ।। आं ।। जैन धर्म रो महापर्व ओ शुभ संदेशो ल्यायो है । मोह नींद स्यू जागो लोगां सुंदर अवसर आयो है । मैत्री रा गीत गावां होSSSSS हरषावां ।।१।। अपणै

Jain Bhajan, Paryushan, Terapanth

Kshamayachana Geet (Saptlaskh Je Jati Prithwi) पर्युषण

क्षमा याचना गीत श्रीमज्जयाचारय‌ सप्त लक्ष जे जाती पृथ्वी श्री सप्त लक्ष अपकाय, इत्यादिक चउरासी लाख जे जीवायोनि खमाय ।  सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।१।। गण में सन्त सती गुणवन्ता, सगला भणी खमाय ।  निज आतम प्रति नरम करी नै, मच्छर भाव मिटाय ।। सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।२।। किणहिक सन्त सती सूं

Deeksha, Jain Bhajan

Ubha O Vairagan

तर्ज: तेजा ….. ऊभा ओ वैरागण ऊभा ओ वैरागण, दादोसा री पोल ओ वैरागण। कोई लिख यो दादोसा, वैरागण बाई न आगन्याजी राज ।। ध्रुव ।। आगन्या वैरागण, लिखी ए न जाय, ओ वैरागण। कोई छाती छलीजे, हिवड़ो होलरै जी राज ।।१।। छाती दादोसा, काठी कर राख ओ दादोसा। कोई हिवड़ों छलास्यां महारासा रे, ज्ञान

Bhachya, Jain Bhajan

Neminath Ki Jan

नेमीनाथ जी की जान नेमजी की जान बणी भारी, देखण को आये नर नारी असंख्या घोड़ा और हाथी, मनुष्य की गिनती नहीं आती। ऊंठ पर ध्वजा जो फहराती, धमक से धरती धर्राती समुद्रविजय जी का लाडला, नेम उन्हों का नाम।  राजुलदे को आये परणवा, अग्रसेन घर ठाम।  प्रसन्न भई नगरी सब सारी ।।१ ।। नेमजी…..

Jain Bhajan

Solah Sati Stawan,Adinath Adi Jinvar Bandi

सोलह सती स्तवन लय: प्रभाती  : मुनि उदयरतनजी आदिनाथ आदि जिनवर बंदी, सफल मनोरथ कीजिये ए। प्रभाते उठी मांगलिक कामे, सोलह सतीनो नाम लीजिए ए।। 1. बाल कुमारी जग हितकारी, ब्राह्मी भरत नीं बेनडी ए। घट-घट व्यापक अक्षर रूपे, सोलह सती मांही जे बड़ी ए।। 2. बाहुबल भगिनी सती सिरोमणी, सुन्दरी नामे ऋषभ सुता ए।

Adhyatmik, Jain Bhajan

Ki Man Ko Shant Banaye Hum

सांस सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम से जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनो को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम् बन जाए हम  कि मनको मन को शान्त बनाये हम  2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाये  भूतकाल के

Jain Bhajan

Parmeshti Stavan

परमेष्ठी स्तवन (लय- नीले घोड़े रा असवार) मंगल महामंत्र नवकार, ऋद्धि सिद्धि का भंडार । भक्ति रस से गावो रे, सिद्धि पथ अपनावो रे । परमेष्ठी पंचक में पहला, अरिहंतों का नाम । तीर्थंकर पद किया सुशोभित, सफल हुए सब काम । चारों तीर्थ बने गुलजार, पाकर तुम जैसा आधार ||1|| परमात्मा पद पर हैं

Jain Bhajan

Duniya Me Dev Aneko Hai Arhant Dev Ka Kya Kahna

दुनिया में -2देव अनेको है, अरिहंत देव का क्या कहना  उनकेअतिशय का क्याकहना,उनकेआश्रय का क्याकहना दुनिया में देव अनेको है अरिहंत देव का क्या कहना  जो दर्शन ज्ञान अनंता है ,जो राग दैष जंयवता है-२  जहाँ समकित -2दीप जले नित है  उनकी क्षमता का क्या कहना   जो आदि,धर्म की करते हैं, भव्यों के भव को

Jain Bhajan

Mantra Navkar Hame Prano Se Pyara

मंत्र नवकार हमें प्राणों से प्यारा, ये है वो जहाज जिसने लाखों को तारा अरिहंतों का नमन हमारे, अशुभ कर्म अरि हनन करे । सिद्धों के सुमिरन से आत्मा, सिद्ध क्षेत्र को गमन करे । भव भव में नहीं जन्में दुबारा ॥मंत्र नवकार…॥१॥ आचार्यों के आचारों से, निर्मल निज आचार करें । उपाध्याय का ध्यान

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