Tapsya Nirali Re
तपस्या निराली रे (लय : सावन आयो रे) रचयिता : साध्वी राजीमतीजी तपस्या निराली रे, देखो चमकै है तपसी रो दीदार, खुल ज्यावै सुरगां रा भी द्वार, मिट ज्यावै जनमां रा विकार। संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे ।। करड़ो काम तपस्या रो, विरला ही कोई कर पावै, नाम सुण्यां ही जीवड़ो कांपै, धड़कन भी […]