Ho Padhare Sativar Ji

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.

तर्ज (Tune): मैं निकला गडी लेकर

भजन के बोल / Lyrics

हो पधारे सतिवरजी हम सबके हो मन मे एक जोश आया । होसबके मन भाया 
हो किस्मत से हम सबने साध्वी श्री का प्रवास पाया  हो सबके मनभाया
सपनों की नींद से जागे अब, आलस प्रमाद को त्यागे अब  क्यों सोए बन अनजान अरे समणी जी जगाने आए अब 
हो अज्ञान के तिमि करर को हटाने हो ज्ञान का
एक दीप जलाया। हो सबके मन भाया 
छोड़े अब कल की बात और बस वर्तमान को याद करे झूठे झगड़ों छोड़ अरे बस स्नेह प्यार की बात करें 
हे, हिलमिल कर रहने को समरसता का मधुरता का एक गीत गाया 
हम गण के है गण अपना है गुरुवर ने, देखा इक सपना  हर गांव गांव ज्ञानशाला हो और बच्चे सुसंस्कारी हो
 हम सबने हिलमिल कर गुरुवर के सपने को साकार बनाया
 सतिवर जी अर्ज हमारी है एक महीना मांग हमारी है इससे ज्यादा फिर जितना भी आगे से मर्जी  तुम्हारी है
 हा करदो जल्दी से हाँ हम सबका मन हर्षाया

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top