यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
मेरी भी कोई बहना होती भोली भाली गुड्डिया जैसी
यानि बिलकुल तेरे जैसी फिर तो झूम के गाते हम पिए बिना लहराते हम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम
मेरी भी कोई बहना होती भोली भाली गुडिया जैसी यानि बिलकुल तेरे जैसी फिर तो झूम के गाते हम पिए बिना लहराते हम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम
वो जब होती छोटी सी तो सबका दिल बहलाती
वो वो जब होती छोटी सी तो सबका दिल बहलाती
वो आती जब स्कूल से वापस जेक्क एंड जिल फिर गाती वो ताता थईया करके सारे को नाच दिखाती वो वो जब रोती और चुप ना होती उसका मन बहलाते हम और झूम के गाते हम झूम झूम झूम झूम झूम झूम
झूम झूम झूम मेरी भी कोई बहना होती
वो गुडिया जब होती सयानी सहजादी कहलाती वो वो गुडिया जब होती सयानी सहजादी कहलाती
वो सोलह बरस की जब हो जाती प्रीतम के घर जाती वो और जब उसका मन घबराता हमसे मिलने आती वो भईया कहकर वो शर्माती मन ही मन मुस्काते हम और फिर झूम के गाते हम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम झूम मेरी भी कोई बहना होत
लेकिन ये सब ख्वाब है जिनकी कोई ताबीर नहीं
लेकिन ये सब ख्वाब है जिनकी कोई ताबीर नहीं
मन दर्पण में जिसको सजाते ऐसी कोई तस्वीर नहीं
मैंने कैसी किस्मत पाई सुनी पड़ी है मेरी कलाई कौन कहेगा मुझकों भाई कौन कहेगा मुझकों भाई मुझकों भाई