Rakhi Ka Parv Aaya

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.

रक्षाबन्धन

तर्ज (Tune): जय हो जय जगदंबे काली

भजन के बोल / Lyrics

 राखी का पर्व आया खुशियों ने रंग बरसाया
मैत्री के मंगल मोती वॉरति 
हो बहिन भाई की आरती उत्तारती
 ① सजी कलाई भाईकी, बहना मन में हरसाती है 
अपनी रक्षा का भैया से आश्वासन पा जाती है नाजुक धागे का बंधन रोली मोली और चन्दन
प्रीत की बगिया संवारती 
रक्षक है भगवती अहिंसा सब जीवो की माता है ।। 
इससे जोड़े प्रेम का बन्धन, सबकी आश्रय दाता है
 है वरदानं अभय का मिलता( है वरदान विजयका मिलता)
भव सागर पार उतारती 
(1) आपस में विश्वास बढे और स्नेह भाव की फसल उगेइक दूजे के हित संपादन में सबकी शक्ति में लगे,
ज्ञान वाला के बच्चे सीखें गुण अच्छे-अच्छे 
साधर्मिक वत्सलता पुकारती।

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