यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
श्री शिव आराधना
तर्ज (Tune): धमाल.
भजन के बोल / Lyrics
शंकर रम रयो रे, पहाड़ों में, गौरा पार्वती के संग-२।।
सेर खा गयो खारी तमाखू, सेर पी गयो भंग रे,
आक धतूरा भोग लगाता, रहे नशे में दंग, शंकर ….।।
ढोलक बाजे मजीरा बाजे, और बाजे मृदंग रे,
भोलेनाथ का उमरू बाजे, महारानी के संग, शंकर ….।।
हाथ में थांरै त्रिशूल भाला, भस्मी रमाली अंगा रे,
माथे पे थांरे चन्द्र बिराजै, जटा बिराजै गंग, शंकर….।।
कोरा कोरा कलश मंगाया, ज्यां में घोल्या रंग रे,
“सूरदास” की काली कम्बल, चढ़े ना दूजा रंग, शंकर ….।।