Pani Re Bale Jyu Jeevan Bah Jyavela

पाणी रे बालै ज्यूं

(तर्ज – इक परदेशी……..)

साध्वी अणिमाश्री
पाणी रे बालै ज्यू जीवन बह ज्यावैला ।
भरती बिरियां बोल आड़ो कुण आवैला ।।
पाई-पाई जोड़णै में जीवन बीतायो ।
रात-दिन दौड्‌यो, सोच लाभ के कमायो ।
भरोड़ी तिजो रया, बेटा-पोता खावेला ।।
कियां तूं नचितो बैठयो, सोच अरे बाबला ।
उलझयो. क्यूं माया में, औ दो दिनां रा चावला ।
मौत रे मूंडे स्यूं कोई नहीं बचावैला ।।
चढ़ता दिनां रो साथी होवै जग सारो ।
दुःख री घड़ी में देवै धर्म ही सहारो ।
करलै धर्म कमाई इण स्यूं सुख पावेला ।।
निर्झर सो तूं निर्मल बणकर मन नै संवार लै ।
ढीलो मत छोड़ अब तो नैया भव स्यूं तार लै ।
शुद्ध भाव री औषध भव रो रोग मिटावैला ।।

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