Adinath

Adinath, Rishabh Dev

1.PrathamJain TirthankarBhagwan Shree Rishabh Dev Ki Kahani

1st Tirthankar Bhagwan Shree Rishbhnath Ka Symbol (Pratik)-Bull जैन काल गणना में एक काल-चक्र बीस करोड़ा-करोड़ सागरोपम का होता है। काल-चक्र के उत्सर्पिणी तथाअवसर्पिणी नाम से दो विभाग हैं, प्रत्येक विभाग दस-दस करोड़ा करोड़ सागपरोपम का है। उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी के छः-छः विभाग होते हैं। उन्हें आगम की भाषा में ‘आरा’ कहते-हैं। उत्सर्पिणी काल के […]

Adinath

Jay Jay Bolo Nabhi R Lal Ri

(लय- अलख जगावा) जय -2 जय बोलोनाभि र लालरी-2 कटज्या करम तमाम  आदीश्वर रोनाम प्यारोलागे है…..माला नाम नाम रटता सिद्ध हुव सब काम प्यारो लागे पुन्याई रो पूत्तलो, ज्ञान रो है दिवलो धर्म धूरी अवतार, प्यारो लागे हैआदीश्वर रोनाम वनिता दूलारों मरुदेवा प्यारो । स्वपन कियो, साकार पहला ही राजा,सिखाई रिवाजा, ब्राह्री सुन्दरीरोतात, प्यारो लागे

Adinath

Rishbhay Namh

ऋषभ स्तुति(श्रमण सागर) (लय : जय बोलो संघ सितारे की) ऋषभाय नमः, ऋषभय नमः-2 ॐ ह्रीं श्रीं क्लींकाराय नमः ऋषभाय नमः – 2 क्रों क्रों क्रों सौख्य षिवाय नमः -2 हनि-हनि स्वाहा आह्राय नमः, ऋषभाय नमः -2 2. पहले मानव पहले नेता, पहले अर्हम इन्द्रिय जेता, पुरुषोत्तम स्वांत – सुखाय नमः ऋषभाय नमः-2 2. ॐ

Adinath

Mere Aadi Nath Tumko Lakho Pranam

लय- (सांवरे की बंशी पुकारे राधा नाम) मेरे आदिनाथ तुमको लाखों प्रणाम  जपू बार -2 तेरा सुखदायी नाम  मेरे आदीनाथ को भजने से काम -2 जपू बार-2 तेरा सुखदायी नाम -2  हो हों हो चैत बदी, नवमी को जन्म लिया तुमने। माता मरू देवी को धन्य किया तुमने   नाभि राय राजा जी पिता का

Adinath, Tapsya

Khushi Hum Aaj Manate Hai (Akshay Tritiya, Parna)

खुशी हम आज मनाते हैं (तर्ज :आज मेरे यार की शादी है)  खुशी हम आज मनाते हैं, आज मनाते हैं, मधुर संगीत सुनाते हैं ।। ध्रुव ।। स्वर्ण रवि आज उदित है – ओ हो,  कि जन-जन आज मुदित है – आ हा…  मधुर संगीत मुखर है,  प्रणत अक्षर-अक्षर है हो…  आदिश्वर के चरणों में

Adinath, Akshay Tritiya

Ikshu Ras Ka Kiya Parna

पारणा (आखातीज) (तर्ज : देख तेरे संसार की) इक्षुरस का किया पारणा आखातीज महान, जय जय आदीनाथ भगवान। श्रेयांस कुबेर ने दिया भावसे आज सुपात्र दान, जय जय आदीनाथ भगवान। ऐसा करम उदय में आया, बारह मास तक आहार न पाया। सुखी कल्पवृक्ष सी काया, फिर भी दिल में नहीं घबराया। घर घर में नित

Adinath, Akshay Tritiya, Bhachya

Aaya Adishwar Bhagwan

अक्षय तृतीया (चमकै अंगणियो) आया आदीश्वर भगवान, चमकै आंगणियो जी, आंगणियो । बरसी तपरो आज, करसी पारणियो जी, पारणियो ।। १. मरुदेवी रा लाल, नाभिनन्दन है जी, नन्दन है।  तारक दीन दयाल, सौ सौ वन्दन है जी वन्दन है ।। २ राज-रिद्धि ने त्याग, संयम स्वीकार्यो जी, स्वीकार्यो। कितो बड़ो वैराग, मौनी-व्रत धार्यो जी, व्रत

Adinath

Pranamu Pratham Jinand Ne(chobisi,jayachary) Choubisi,chaubisi

आदिनाथ स्तवन प्रणमूं प्रथम जिनन्द नैं जय जय जिन चंदा १. वन्दू बेकर जोड़ नैं, जुग-आदि जिनिन्दा।  कर्म-रिपु-गज ऊपरै, मृगराज मुनिन्दा ।। २. अनुकूल प्रतिकूल सम सही, तप विविध तपंदा।  चेतन तन भिन लेखवी, ध्यान शुकल ध्यावंदा ।। ३. पुद्गल-सुख अरि पेखिया, दुख-हेतु भयाला।  विरक्त चित विघट्यो इसो, जाण्या प्रत्यक्ष जाला।। ४. संवेग- सरवर झूलता,

Adinath, Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Aayi Aayi Akshay Tritiya

(लय-मांयन-मांयन मुडेर) आई आई अक्षय तृतीया, दिल में खुशियां छाई। ऋषभ प्रभु ने किया पारणा, मंगल बेला आई। हो—- ऋषभ देवा 1. त्याग तप की लेकर शक्ति, घुमें बाबा ज्ञानी।  ऋषभ प्रभु थे मोनी-ध्यानी, वीतराग अनुरागी। तप की साधना से तुमने ज्ञान की ज्योति जलाई।। 2. एक वर्ष तक घूमे बाबा, अन्नजल नहीं है पाया।

Adinath

Shraddha Se Shish Jhukate,Rishabh Prabhu

श्रद्धा से शीष झुकाते श्रद्धा से शीष झुकाते, हम गाते हैं गुणगान। आदि तीर्थंकर ऋपभ प्रभु का, है पावन अभियान ॥टेकः॥ १. मरुदेवा माता के, नन्दन प्यारे। श्री नाभिराजा के, कुल उजियारे। तुमसे जनता ने पाया, असि मषि कृषि का जो ज्ञान ॥ २. प्रभुवर ने राज्य छोड़ा, ली श्रमण दीक्षा । एक बरस तक,

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