Fagan Me Chhayi Bahar
(लय-नखरालो देवरियो) फागग्ण में छायी बहार रंगीली ऋतुआई है होली री मची रे धमाल धरा सरसाई है मदरी -2 हवा बसन्ती लहर -2.लहरावे हो मोर पपीहा पिहू-२ कर मीठा बोल सुणावे हो कोयल री सुरीली तान मुरलिया बजाई है शुक्ल पक्षरो चाँद सजीलो दिनपर दिन इतरावै हो मस्त चांदनी नर्तन करती प्रेम को रस बरसावें […]