Holi

Dance, Geet, Holi, Marwari Lokgeet, Rajasthani

Fagan Me Chhayi Bahar

(लय-नखरालो देवरियो) फागग्ण में छायी बहार रंगीली ऋतुआई है होली री मची रे धमाल धरा सरसाई है  मदरी -2 हवा बसन्ती लहर -2.लहरावे हो  मोर पपीहा पिहू-२ कर मीठा बोल सुणावे हो  कोयल री सुरीली तान मुरलिया बजाई है शुक्ल पक्षरो चाँद सजीलो दिनपर दिन इतरावै हो मस्त चांदनी नर्तन करती प्रेम को रस बरसावें […]

Hanuman Ji, Holi

Lachaman Ke Re Ban Lagyo Re Sakti ,

लिक्ष्मण के रे बाण लग्यो रै सगती रे लिछमण के, लग्यो रे सक्ती रे पडयो रे धरतीरे लिछमण के,  ऐसो कोई वीर हो जो लिछमण न जिवावे रे आधो आधो राज सवाई धरतीं रे के तो जिवावै माता सीता सतवंतीरे,  के तो जिवावे हणुमान जती रे ,लिछमण के  काहे”से जिवावे रे, माता सीता सतवंतीरे ,

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Mehandi Rachi Mhara Hatha Me

mehandi rachi mhara hatha me  मेहंदी रची म्हारा हाथा में-२ घुल रह्यो काजल आंख्या म  चुनड़ी रो रंग सुरंग, म्हारा सायब जी ,  आयो झीणो फागणियो -२ हो -हो  मदरो चाले बायरियो ,थाणे हिवड़े सु लगास्या म्हारी जीवरी  जड़ी -2  म्हे हु नाजुक नार नवेली हो हो  …. हु काची कचनार जी  रंग न डारो

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Paglya Ri Payaladi Baje Hatha Ro Chudlo

paglya ri payaladi baje  पगल्या री  पायलड़ी बा जे हाथा रो चुड़लो -2  कन्हैया-2 यमुना में डर लागे रे भर लादे  घड़लो -2  आज तो म आयी कान्हा सखिया र भेले -2  की तड़के आ जैये कन्हैया खाटू शाम र मेले  पगल्या। ….  सासुजी न सुण कोइना ननदुली भोली ओ तड़केओ  तड़के आजाइये सावरिया म्हारी

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Peelo Odh Pomcho Odhyo, Kar Singar

 पीलो ओढ़ पोमचो ओढ़यो(MEHANDI)  पीलो ओढ़ पोमचो ओढ़यो ,कर सिणगार मंडाई जी या मेहँदी -२  सज धज चाली जा य रसोया चाली सासुजी ने जा य दिखाई जी या मेहंदी  दोनो ही हाथ थारा गेरा-गेरा राच्या  थे किन संग बेठ  रलाई जी या मेहंदी  देरान्या जिठान्या मिल पीसी जी आ मेहंदी ,नणदल बैठ रळायी जी

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Paglya M Bandhu Payliya

 पगल्या म बां धू पायलिया  पगल्या म बाँधू पायलिया, थोड़ा धीमा चलो मेरे सांवरिया  थोड़ा धीमा चलो, थोड़ा होले  चलो -२ थोड़ा धीमा चलो मेरे सांवरिया ,पगल्या— रिमझिम रिमझिम मेवला बरसे -२ मंदी मंदी चाले बायरिया -२ पगल्या म बाँधु —- अरे दादर मोर पपीहा  बोले-२  मीठी मीठी बाज रहीं बाँसुरिया -२ पगल्या —– ओ 

Holi

Holi Aayi Re

 होली आयी रे  होली आयी रे ,प्यारी होली आयी रे -२ मेरे देश के कण कण में इक अंगड़ाई छायी रे  रंग बरसाता फागुन आया नयी बहारे लाया ओ  देखो अपनी प्यारी धरती पर खुशहाली छायी रे ,होली आयी —–रे 

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Chal Chanda Dagliye Me Jhini- JhiniChandni

CHAL CHANDA DAAGLIYE M  चा ल चंदा डागलीय पे झीणी झीणी चांदनी -२ कोई हिलमिल रास रचावा ए फागण में ,-२ थार सा ग चालू कोनी  ओ रे बालम रसिया,-२  थे तो सारी सारी रात जगाओ जी फागण में -२ थार थार  खातर मतो बाग लगाया जी कोई घुमन क मिसचालो जी फागण में, चाल

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Jal Jamna Ro Pani

 जल जमना रो पाणी  जल जमना रो पाणी कइया ल्याउ ओ रसिया  पतली लुल लुल जाय -२  छोटोड़ी नणद म्हारी पानी कोनी लावे ‘बा घरा बैठी हुकुम चलावे ओ  रसिया , पतली कमर —— सर पर घड़लो ,घड़े पर मटकी ,मटकी ऊपर कलशो कोणी चाले ओ रसिया  पतली कमर म्हारी ——- ऊँची ऊँची पाल घडो

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Dhore Upar Jeem Khupradi Najar Pasari Khet M

धोरे उपर जीम खुपरडी नजर पसारी खेत म, मूंग मोठ मतीर घणेरा स्वर्ग उतर गयो रेत म। पवन झकोले झुके बाजरो,सिटैयाघड़ियांरहिया, मूंग मगरिये तिल तगरिये मोठडलाबंगला रहिया,  बेलड़ियां फोगां पर छाई नालज पसरा रेत में। तिरछे नैणा हंस कर बोली बाजु बंद घड़वाउली, तेवटिय रो थारो कहयोडो पिवरीय उठ जावुली, तातो न खायो रातों नओढयो,केपडयो

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