Mahapragya

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Mousam Hai Suhano Ujali Bhor

महाप्रज्ञजी (जन्मोत्सव) मौसम है सुहाणो उजली भोर न्हायो हैरोशनी  में गांव टमकोर  तोलामल जी तात निहाल-2 जननी बालू जी खुशहाल पा सुत कालजिय री कोर  लियो दिव्य ज्योति अवतार  स्वागत करे सकल संसार जन समदर म हर्ष हिलोर  मिल्यो विश्व न दिव्य प्रकाश  मैत्री करुणा रो आश्वास विरल अहिंसा यावा दोर  महाप्रज्ञ रो जन्मोत्सव आध्यात्मिक […]

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O Dashame Divya Diwakar(S)

रोशनी पाके गुरुवर से ज्ञान  सूरज उगाया था  गुरु में तुम, तुम्हारे में गुरुका दिल समाया था  घोर कलिकाल में उंचाइया देदी समर्पण को  बने महाप्रज्ञ नथमल से स्वयं गुरु  ने   बनाया था… ओ दशमे दिव्य दिवाकर गुरु महाप्रज्ञ रत्नाकर ओहोहो कैसी भक्ति दिखाई, दिव्य शक्ति है पाई दियातेज संघ को समर्पण बोलता है, मधुर

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Mahapragya Matiman Hai

(लय- आज मंगलवार है) महाप्रज्ञ मतिमान हैं, जिन शासन की शान हैं।  विश्व संत के चरणों में नत मस्तक सकल जहान हैं ।। टेक ॥ छोटे से टमकोर ग्राम में कोहिनूर को जन्म मिला। तोलाराम तात वर माता बालूजी का भाग्य खिला।  योगी का फरमान है, बालक पुण्य निधान हैं||1|| तीन महीने के न हुए

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Namu Mai Mahapragya Matiman

(लय-प्रभो यह तेरापंथ महान) नमुं मैं महाप्रज्ञ मतिमान। जिनके रोम-रोम में झलके,  श्री तुलसी महाप्राण ।। नमुं मैं महाप्रज्ञ…… जन्मभूमि टमकोर तिहारी, माता सति बालूजी प्यारी, नत्थू नाम दियो सुखकारी। जद कुण सोची नत्थू पासी, गण रो दशमो स्थान ।।1।। नमुं मैं महाप्रज्ञ…. श्री कालू चरणां संयम पथ, शुभदृष्टि तुलसी री अनवरत, मुनि नथमल से

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Mahapragya Gururaj

स्तवना महाप्रज्ञ गुरुराज ।, चरणों श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं। हम सविनय शीष झुकाते हैं ।। पुण्यधरा टमकोर, छाई खुशियां चिहुं ओर, मां बालू हरसाई । प्रभु जन्म हुआ सुखकर, चौरड़िया कुलशेखर, दो बहनों के भाई। हो… स्वप्न हुआ साकार, सब मिल गीत खुशी के गाते हैं ।।111 वैराग्य भाव जागा, मां बालू का सागा, दीक्षा

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Khushiya Aaj Manate Hai

महा प्रज्ञ A खुशिया आज मनाते है मंगल थाल संजातेहै महाप्रज्ञ प्रभु जन्मोत्सव पर बच्चे नी मिलकर गाते हैं  क्या बोले बोलो क्या बोलो H B To you ① शासन सितारे बन चमकेंगे  प्रज्ञा की खुशबू  पा  महकेंगे श्रद्धा समपर्ण का दीपक जले   तेरे कदम पर बढ़ते चले (2) चरणों में तेरे सब आते हैं

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Mahapragy Abhivandana(Kavita)

महाप्रज्ञ के अभिनन्दन में क्या उपहार चढाऊं तन -मन-जीवन किया समर्पित, सत-संस्कार जगाऊं  कालू कर से तुमने पाई, संयम सुर तरू छाया तुलसी के चरणों में तुमने ज्ञान  सुधारस पाया  जीवन की वे स्वर्णिम, घड़ियां मैं कैसे बतलाऊं  सृजनशीलता अनुपम, अद‌भुत, काम कमाल किया है संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी का साहित्य विशाल किया है महाप्रज्ञ की

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Shanti Ka Sandesh

शांति का संदेश देखने का कोण बदलें। सोचने का कोण बदलें,  शांत हो आवेश। हिंसा का कारण है रोटी और गरीबी उसकी चोटी  पर भूखा हिंसा करता जब शांत नहीं आवेश ।।१ ।। जटिल परिस्थिति जब-जब आती तब-तब हिंसा भी बढ़ जाती ,स्थिति कैसे बदलेगी जब तक शांत नहीं आवेश ।। २ ।। कभी क्रोध

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Mahapragya Tera Gun Gan Karu

(लय–आ चलके तुझे  मैं लेके चलू ) महाप्रज्ञ तेरा गुणगान करू मन की ये आश फले  पर शब्द नहीं क्या गीत लिखु, मन श्रद्धा दीप जले  ① आगम के सक्षमज्ञाता हो जैन जगत के सूरज  अहिसा के पदचिन्हो पर शान्ति का सवेरा जागै अणुव्रत प्रेक्षा घर-2 पहुंचे, जन-2 की प्यास बने ② प्रभु वीतरागता तेरी

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Karte Vandan

महाप्रज्ञ अर्चना लय : मिलो न तुम तो करते वन्दन हम अभिनन्दन, बालु सुत महाप्रज्ञ।  भाव से वन्दना है, भक्ति से अर्चना है। १. लाखों की पाई तुमने, एक पलक में श्रद्धा भावना, ऐसी अनोखी विभुता, अमर रहे यह सबकी कामना। भाग्य सरायें, नहीं भुलाएं, तुलसी का उपकार ॥ २. प्रज्ञा के देवता में, जग

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