Bhat Bharan Aayo Re Jaman Jayo
७. भात भरण आयो म्हारो रे जामण जायो, तारां जड़ी ल्यायो चुनड़ी फुल्यो न समायो म्हारो मनड़ो उमायो, बाई हीरां बीच लाल जड़ी – २ नौलख हीरा चुनड़ी जडावै, दसलख मोतीड़ा चमकै – २ सवा लाखको ओढरे गोरवरु घुंघट पर चन्दा चमकै – २ हियो हरषावै उर आनन्द समावै, जद बीरो जी ओढावै चूनड़ी, फूल्यो […]