Paras

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1.Hai Ye Pawan Bhumi 2.Mere Prabhu Ka Paras Nam

है ये पावन भूमि (तर्ज: ऐ मेरे दिले नादान) है ये पावन भूमि, यहाँ बार-बार आना।  प्रभु पार्श्व के चरणों में, आकर के झुक जाना ।।  भटके हुए राही को, तुम राह दिखाते हो।  जो तेरी शरण आये, उसे पार लगाते हो ।।  आये हैं तेरी शरणे, खाली ना लौटना ।।। है ये …  संकट […]

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Karti Hu Vandana Moksgami

करती हूँ वन्दना मोक्षगामी  (तर्ज : आधा है चन्द्रमा रात आधी) करती हूँ वन्दना मोक्षगामी। रह न जाये कोई मेरी साध स्वामी। प्रभु पार्श्व स्वामी ।।  मैं तो आई हूँ आस लगा के, अब जाऊँगी दर्शन पा के। मेरे प्यासे नयन होवे कैसे मगन-2 बिन दर्शन तेरे त्रिभुवन स्वामी, करती हूँ… ।।  तेरे चरणों में

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Tumse Lagi Lagan

श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ भगवान की स्तुति तुम से लागी लग्न, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा। मेटो-2 जी संकट हमारा।। निश दिन तुमको जपूं पर से नेहा तंजू। जीवन सारा, तेरे चरणों में बीते हमारा।। मेटो-2 जी संकट हमारा।। अश्वसेन के राज दुलारे, वामा देवी के सुत प्राण प्यारे। सब से नेहा तोड़ा, जग से

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He Shankheshawar Parshv Jineshwar

( तर्ज-मेरे नैना सावन भादो) हे शंखेश्वर पार्श्व जिनेश्वर अर्जी सुनो हम लाए हम लाए हम लाए ④ नाव, पुरानी है पार लगानी है साहिल ही जब छूट गया हो धीरज कौन बंधाए कोई नजर नहीं  आए परमेश्वर तेरा सहारा पाये ② कित्‌नो, को तारा है भवसे, उबारा है। द्वार पे तेरे आए प्रभुवर झोली 

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Karta Hu Vandana Mokshgami

(तर्ज-आधा है चन्द्रमा) करता हूँ वंदना मोक्षगागी रह न जाये कोई मेरी साध स्वामी प्रभु पाश्र्व स्वामी  मै तो आया हूँ आश लगाके, अब जाऊंगा दर्शन पाके  मेरे प्यासे नयन  केसे हो गये मगन, बिन दर्शन तेरे त्रिभुवन स्वामी   तेरे चरणों में शीश झुकाके, करू वन्दन मैं तेरे गुण‌ गाके तू है तारण तरण मुझे

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He Chintamani Vamanandan

(लय- दिल दिया है जा भी देगे (कर्मा)) हे चिन्ताम‌णी वामानन्द‌न तुमसे हम विनती करे  तुमसे मांगे ज्ञान प्रभुवर तुमसे हम विनती करे तुम हो प्रभू घट-2 के वासी तुम बसे हर सांस में  फिर भी हम जान ना पाए हम रहे अज्ञान में  हे करुणामय माफ करदो तुमसे हम विनती करें दुखियो की बिगड़ी

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Pranmami Sada Prabhu Parshv Jinam

प्रणमामि सदाप्रभु पार्श्वजिनं,  जिननायक दायक सौख्य धनम्। धनचारू मनोहर देहधरं,  धरणिपति नित्य सुसेवकरम्  करुणा रस रजिंत भव्यफणि, फणसप्त सुशोभित मौलिमणि मणिकांचन रूप त्रिघोर घटं, घटितासुर किन्नर पाश्र्वतटम्। – तटिनि पति धोष गंभीर स्वरं  शरणागत विश्व अशेषनरम्  नरनारी नमस्कृत नित्य मुदा,  पद्‌मावती गावती गीत सदा  सतत्तेन्द्रिय गोप यथा कमठं, कमठा सुरवारणमुक्तहठं हठहेलित कर्म कृतान्तबलं,  बल-धाम दलंदल

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Vamadevi Ke Pyare

Lay-Suraj kab door Gagan se वामा देवी के प्यारे, तुम अश्व सेन के दुलारे  हो पारसनाथ तुम्हारे चरणो मे हम सबका वंदन है  ① जलती अग्नि से नाग का जोड़ा तुमने बचाया महामंत्र नवकार सुनाकर उनको देव बनाया  चिंतामणी वाले स्वामी प्रभु तुम हो अंत्तरयामी   हो पारस नाथ तुम्हारे चरणो में — २ बन जाओ

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Prabhu Man Mandir Me Aao

(लय- वीरा रमक झमक होय आइजो ) प्रभु मन मन्दिर में आओ म्हारो जीवन सफल बनाओ ओ प्रभु मन मन्दिर में आओ 1.अज्ञान नींद म सोयो आत्मा रो वैभव खोयो ओ  थे ज्ञान प्रदीप जलाओ  -2 .भव भव मे भमता आयो, नर तन उत्तम पायो  म्हारी नावा पार लगावो ओ  मुझ न ओ शरणो थारो 

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Jay Bolo Parshv Jineshwar Ki

जय बोलो पार्श्व जिनेश्वर की (लय : ओम् शांति जिनेश्वर) जय बोलो पार्श्व जिनेश्वर की।  जय ज्योतिर्मय जगदीश्वर की ।। ध्रुव ॥ प्रभु पार्श्व जाप से कष्ट कटे,  भव-भव का सब सन्ताप मिटे।  मंत्राक्षर संज्ञा प्रभुवर की ॥१ ॥ दुख नाग युगल का दूर किया,  नवकार मंत्र से बोध दिया।  बस फले कामना विषधर की

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