Shyam

Krishna Ji, Shyam

O Murali Wale Tu Murali Bajana

(तर्ज – फिरकी वाली) श्याम आराधना  ओ मुरली वाले, तू मुरली बजाना  नही तरसाना  इस मुरली की तान से, तेरी मुरली बजे है बड़ी शान से  मुरली बजायी तूने रास मंडल में राधे के मन भाय गई  संग मे थी जितनी भी सखियां वो दोड़ी -२ आय गयी       हेनंदलाला  मदन गोपाला कैसा जादू […]

Krishna Ji, Shyam

Radhe Kaun Se Punya Kiye Tune

राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं, राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं।। राधे जब सोलह श्रृंगार करे, राधे जब सोलह श्रृंगार करे, हरी दर्पण रोज दिखाते हैं, राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं…….. राधे जब भोजन तैयार

Krishna Ji, Shyam

Mira Ne Sab Kuch Chhoda

मीरा बाई भजन ( लय-फिरकी वाली तू कल फिर आना) मीरा  ने सब कुछ छोड़ा हरि से नाता जोड़ा,   आराध्य उन्हें मान के, ऐसी लगन लगाई घनश्याम से ज़हर का प्याला राणा जी ने भेजा  पी गई पी गई हाँ हाँ मीरा पी गई ओहो मीरा पी गई अमृत का प्याला मान के  ऐसी लगन

Krishna Ji, Shyam

Ab Saunp Diya Is Jivan Ka

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥ मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं। अर्पण करदूँ दुनिया भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥ जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल

Krishna Ji, Shyam

Madhrarashtkam Lyrics

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥२॥ वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥३॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं

Krishna Ji, Shyam

Apne Bhakt Ko Kitna Pyar Karta Hai

।। श्री श्याम वन्दना ।। (तर्ज-हनुमान को खुश करना…) अपने भगत से कितना वो प्यार करता है,  रहता है खाटू में पर ध्यान रखता है ।। जब भी पुकारूँ मैं वो दौड़कर आये,  चाँदी का सिंहासन वो छोड़कर आये,  अपने भगत पर कितना उपकार करता है ।। रहता है… करता है रखवाली दिन रात भक्तों

Krishna Ji, Shyam

Holi Khelanga Aapa Girdhar Gopal Se

।। श्री श्याम वन्दना ।। (तर्ज-छुरियाँ चल जाये…) तुम झोली भरलो भक्तों, रंग और गुलाल से,  होली खेलागां आपां, गिरधर गोपाल से ।।टेर ।। कोरा-कोरा कलश मंगाकर, उसमें रंग घुलवाना-२,  लाल-गुलाबी न, नीला पीला, केशर रंग मिलवाना-२ , बच बच कर रहना उनकी, टेढ़ी मेढ़ी चाल से ।। होली… लायेंगे वो संग में अपने, ग्वाल-बाल

Krishna Ji, Shyam

Ahsan Tera Bhakt Pe Kafi Hai Sanwre

।। श्री श्याम वन्दना ।। (तर्ज-एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा…) एहसान तेरा भक्त पे, काफी है साँवरे,  हर भूल की देता हमें, माफी तू साँवरे ।। टेर ।। इतना दिया है तूने, कर्जदार है तेरे,  लेकिन चुका न पाये, गुनाहगार हे तेरे,  लेने में फिर भी शर्म, ना आती है साँवरे ।१।। अपना बनाया तूने,

Ktishan, Shyam

Kan Kan Me Vas Hai Jiska

।। श्री श्याम वन्दना ।। (तर्जः ये बन्धन तो प्यार का ……) कण कण में वास है जिसका, तिहुलोक में राज है उसका, हारे का साथ निभाये, प्रेमी पर प्रेम लुटाये,  ऐसा तो हमारा बाबा है, बाबा तो हमारा है ।। टेर ।। श्याम प्रभू को कोई, अपना बनाकर देखे,  कितना प्यार लुटाता, प्रेम बढ़ाकर

Krishna Ji, Shyam

Mai Kahu Radhe Radhe

।। श्री श्याम वन्दना ।। (तर्ज-थोड़ा प्यार हुआ है…) मैं कहूँ राधे-राधे, तुम कहो राधे-राधे,  राधे का ध्यान धर लो, सब कहो राधे-राधे ।। * राधे का नाम है पावन, सबको लगता मनभावन, *राधे का नाम है भगति, तुम कहो क्या है कारण, * ब्रह्मा-विष्णु-शिव सब ही, रट रहे राधे-राधे, मैं कहूँ.. * श्याम भी

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