Tapasya Geet

Bhachya, Tapasya Geet

Tap Ki Mahima Anupam Jag Me

तप की महिमा अनुपम जग में  (तर्ज – दिल लुंटने वाले जादूगर…. ) रचयिता : साध्वी अणिमाश्री तप की महिमा अनुपम जग में, सब तप का गौरव गाते हैं। तप की नौका में बैठ सभी, इस भव-जल को तर जाते हैं। है तेज भरा तप में अद्भुत, तप जीवन को चमकाता है । कर्मों का […]

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Tap Ro That Lagao

तप रो ठाट लगाओ सावण में (तर्ज – बादलियो आंखड़ल्या में.) रचयिता : साध्वी अणिमाश्री तपस्या रो मौसम आयो, हां मौसम आयो । रंग नयो ओ ल्यायो है, जन-जन में । तपस्या करणी है अब तो कमरां कसल्यो, कमरां कसल्यो । जोश घणो उमड़ायो है जन-जन में ।। जनम जनम रा पातक सारा, तपस्या स्यूं

Bhachya, Tapasya Geet

Tap Ri Ganga Me Jo Nhave

तप री गंगा में (तर्ज – धरती धोरां री….) रचयिता : मुनिश्री दिनेश कुमार तप री गंगा में – ३ तप री गंगा में जो न्हावे, कचरो करमां रो बह ज्यावे, आत्मा उज्जवलतम बण ज्यावे, तप री गंगा में……. १. तपस्या जीवन ने चमकावे, तप स्यूं भूत-प्रेत भग जावे, तपसी तप री अलख जगावे, तप

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Barase O Savniyo Rimjhim

बरसे सावणियो ओ रिमझिम (तर्ज : म्हानें गंगा जी रो….) बरसे सावणियो ओ रिमझिम, तप रो रंग बरसे पलछिन । भरल्यो इण रंग स्यूं थे थारी प्यारी जीवन गगरी ।  रंगल्यो सोहणी, मनमोहणी, तपस्या री चूनरी ।। बेला, तेला, करो अठाई, जो थारे मन में आवै ।  पखवाड़ो और मासखमण तो, विरला कोई कर पावै

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Gava Gava Tap Gun Gan Tapasi Re Aangniye

गावा गावा तप गुण गान  तपसी रे आंगणीये  तपसी रो करा सम्मान  तपसी रे आंगणीये  क्षयो पक्षम जदजोर लगावे  तप करणे री मन मे आवे  हुवे चरण गतिमान  तपसी रे आंगणीये  हुवे चरण गतिमान  तपसी रे आंगणीये  तनडो बोले खाउ खाउ  मनडो बोले दोड  लगाउ  पण तप आतम रुझान  तपसी रे आंगणीये  गावा गावा तप

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