Tapasya (तपस्या)

Guru

Guru Meri Pooja

, जिथबिठरावे तिथतिथबैठूं,जोपहरावे सोईसोईपहरू मेरीउनकी रीतपुरानी,जोबेचूँ सो बिकजाऊँ गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत गुरुमेरादेऊ,अलखअभेऊ,सर्वपूजचरणगुरुसेवऊ गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत गुरुकादर्शन…..देखदेखजीवां,गुरुगुरुकेचरणधोये-धोयेपीवां गुरुबिनअवरनहींमैंठाऊँ,अनबिनजपऊगुरुगुरुनाऊँ गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्मा,गुरुभगवंत गुरुमेराज्ञान,गुरुहिरदयध्यान,गुरुगोपालपुरखभगवान् गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत ऐसेगुरुकोबल-बलजाइये..-2आपमुक्तमोहेतारें… गुरु गुरुकीशरणरहोकरजोड़े,गुरुबिनामेंनहींहोर मेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत गुरुबहुततारेभवपार,गुरुसेवाजमसेछुटकार गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत अंधकारमेंगुरुमंत्रउजारा,गुरुकेसंगसजलनिस्तारा गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत नमैंसोनी,नगुणपल्ले,मैंकिसदामानकरेसा, चारोंचूकामेरियाचीकडभरियामैंकेडीकेडीमलधोसा इकसाबनथोड़ाउत्तोंमैलघनेरी,मैंकेडेकेडेकपडेधोसा, बुल्लेशाहमुर्शदजेमैंनमिलयो,मैंबैठकिनारेरोसा, गुरुपूरापाईयाबडभागी,गुरुकीसेवाजिथनालागी गुरुमेरीपूजा,गुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्म,गुरुभगवंत गुरुकाशब्दनमेटेकोई,गुरुनानकनानकहरसोई गुरुमेरीपूजागुरुगोविन्द,गुरुमेरापारब्रह्मगुरुभगवंत

Guru

Meri Lagi Guru Sang Preet

मेरे लगी गुरु संग प्रीत मेरी लगी गुरु संग प्रीत, ये दुनियाँ क्या जाने ll क्या जाने कोई क्या जाने, मैं जानू याँ वो जाने ll मुझे मिल गया ll, मन का मीत, ये दुनियाँ क्या जाने मेरी लगी गुरु ……….. छवि लखी मैंने, गुरु की जब से भया दीवाना, मैं तो तब से बाँधी

Guru

Sare Tirth Dham Aapke Charno Me

कर्ता करें न कर सके,गुरू किये सब होय। सात द्वीप नौ खण्ड में गुरु से बड़ा न कोय ।। सारे तीर्थ धाम आपके चरणों में हे गुरू देव प्रणाम आपके चरणों में। हृदय में मां गौरी लक्ष्मी कंठ शारदा माता है। जो भी मुख से वचन कहे वो वचन सिध्द हो जाता है। हे गुरू

Guru Bhakti

Guru Dev Daya Karke Mujhko Apna Lena

गुरु वन्दना (लय : ए मेरे दिले नादान) गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना।  मैं शरण पड़ा तेरी, चरणों मे जगह देना। करुणा निधि नाम तेरा, करुणा दिखला जाओ,  सोये हुए भाग्यों को, हे! नाथ जगा जाओ,  मेरी नाव भंवर डोले, इसे पार लगा देना ॥१ ॥ पापी हूं या कपटी हूं, जैसा भी हूं

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Jo Bhi Mila Khajana Use Bant Jana Re

मिला खजाना (तर्ज : नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया……….) जो भी मिला खजाना उसको बांट जाना रे। क्या जाने कब होगा इस धरा पर आना रे । । ध्रुव ॥ बहुत कमाया बहुत ही खाया काफी मौज उड़ाई। श्रम से कोड़ी कोड़ी जोड़ी पूंजी खूब बढ़ाई। मिट्टी के सब खेल खिलौने मत फस

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Durlabh Manav Jeevan

दुर्लभ मानव जीवन (लय : ऐ मेरे दिले नादान……..) दुर्लभ मानव जीवन तेरे हाथ मे आया है,  इस क्षण भंगुर जग में, मन क्यों ललचाया है। दुर्लभ……. ॥ ध्रुव ॥ यह तन तो मिट्टी का, एक बना खिलौना है,  इस नश्वर तन को तो, इतना क्या धोना है,  जिसने छोडी ममता उसने सुख पाया है।

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Mat Kar Re Mat Kar Re

-: आखिर तो जाणो पड़सी :- (लय : सुण सुण रे…………) मत कर रे, मत कर रे मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ १. सुख स्यूं जीणो, सुख स्यूं मरणो, अरिहन्तां रो साचो शरणो । बेटा पोता के करसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥ २. चार दिनां री चमक

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Kiwadi Khol Hiye Ri

किंवाडी खोल हियैरी (लय : मिलो न तुम हम घबरायें) माटी री मूरत है काया, क्यूं तू देख लुभायो ? किंवाड़ी खोल हियै री। झूठी सारी ममता माया, थोथै भरम भुलायो, किंवाड़ी खोल हियै री ॥ स्थायी ॥ जीणो है थोड़ो सो, किसी बात पर तूं बण्यो आकरो ? खावै पंसेरी री, फैंके जो दूजां

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Jhuthi Jag Ki Maya

झूठी जग की माया (लय : मेरे मन की गंगा) झूठी जग की माया, और मिट्टी की यह काया रे। बोल बन्दे ! बोल, तूने जाना क्यों नहीं। १. खाली हाथ तूं आया जग में, खाली हाथ ही जायेगा, चुग जायेगी खेत ये चिड़िया, हाथ मसल रह जायेगा। पग पग खड़े लुटेरे, तूं लूट जाना

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Thari Ankhya Me Loi Ro Ufan

थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण थांरी आंख्या में लोही रो ऊफाण। छोड़ो क्यूं कोनी क्रोध रो नशो ?  थांरी अक-बक बकणै री पड़गी बाण। दूजां नै काले नाग ज्यूं डसो ॥ ध्रुव ॥  क्रोध बड़ो दुर्गुण दुनिया में, घट-घट में वसनारो। जिण घट में नहि क्रोध निवासी, बो नर जगत-सितारो ॥ पंचेन्द्रिय प्राणी री

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