Tapasya (तपस्या)

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ki Mahima Ajab Nirali

(तर्ज – माईन माई मुंडेर पे…) तप की महिमा अजब निराली, तप जीवन उजियारा  तप गंगा में नहायेगा जो, पाये भव से किनारा  तप गुण गाये हम ॥   १. तप वीरों का आभुषण, तप मुक्ति का महापथ है  मोक्ष नगर ले जाने वाला, तप ही सच्चा रथ है।  तप नौका से मंजिल पायें, तप ही […]

Bhachya, Tapsya Geet, Varshitap

Rang Birange Tap Sumano Se, Varshitap

(लय-यह भारत देश है) रंग बिरंगी तप सुमनों से, सुरभित दशों दिशाएं। लो मंगल गीत सुनाएं।। 1. हर फूल खिला, हर कली खिली, वरसा वर्षीतप सावन, जुही चंपा और चमेली, बना गुलाब यह शतदल। भीनी भीनी सौरभ से, गाती है गीत हवाएं। 2. नन्दनवन के इस उपवन में, बहते तप के झरने, तप गंगा में

Bhachya, Tapsya Geet

Ghor Tapsi Ki Dhal

(तर्ज और रंग दे रे..) घोर तपस्वी मुनि श्री सुखलालजी घोर तपसी हो मुनि घोर तपसी, थारो नाम उठ-उठ जन भोर जपसीजी।  घोर तपसी हो ‘सुख’ घोर तपसी, थारो जाप जप्यां करमां ही कोड़ खपसी ।। दो सौ बरसां ही भारी ख्यात है बणी, थांरो नाम मोटा तपस्यां रेसाथ फबसी।  ओअनशन आ सहज समता, लाखों

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Ro Melo Mandyo In Nagari Me

(तर्ज : रुणझुणियो) तपस्या रो मेलो मंडयो इण नगरी में। छाई है अजब बहार, मोद मनाओ जी ॥ १. सावणियै में रिमझिम मेहड़लो बरसै, त्यूं तप री झड़ी सुहाय ॥ २. तप री करणी मोटी विरला कर पावै । हिम्मत स्यूं बेड़ो पार ॥ ३. तप रै झीणै मारग वीर पुरुष चालै । कायर दिल

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ka Jab Deep Jale

(तर्ज: मेरे गीत अमर कर दो) जीवन का शुभ अवसर, तप ज्योति जलाई है। तप की महिमा गाते, कलियां विकसाई है ॥ १. तप कठिन साधना है हर एक न कर पाता।  आगम में गाई है जिसकी गौरव गाथा।  कितनों ने तप करके महिमा महकाई है ॥ २. जब भूख सताती है मन चंचल हो

Bhachya, Tapsya Geet

Mahavir Re Shasan Ri Mahima Mahkava,

(तर्ज : स्वामी भीखणजी रो नाम) महावीर रै शासण री, महिमा महकावां । स्वामी भीखणजी रै संघ री, गुण गाथा गावां ।। आओ तपस्या री गंगा में, संयम साबुन स्यूं आ आतमां री, चादर धोवां ।। १. तप की गरमी तेज बढ़ावै, तन मन का सब रोग मिटावै । शासन माता रा सब आओ, मिलजुल

Bhachya, Tapsya Geet

Tapsya Nirali Re,

तपस्या निराली रे तपस्या निराली रे देखो, चमके है तपसी रो दीदार । संयम री  शक्ति तपस्या निराली , रे। देखो खुल जावे सुरगां रा भी द्वार, मिट जावे जन्मा रा विकार संयम री शक्ति तपस्या निराली रे ।। १. करड़ो काम तपस्या रो, विरला ही कोई कर पावै, नाम सुण्या ही जीवड़ो कांपै, धड़कन

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Su Atma Me Bhari Bal Aave,

तप स्यूं आतमा में भारी बळ आवै, कचरो करमा रो पल भर में जळ ज्यावै, कंचन वरणी होवै काया, रोग-दोख खनै आंतां ही घबरावै ॥ स्थायी ॥ कोरी बातां करणी सोरी, मन री तिषणा, तजणी दोरी, उर में ऊंदरा कूदै जद धीरज ढह ज्यावै-तप स्यूं…..॥1॥ इन्द्रयां चंचळ नाच नचावै, बड़ां – बड़ां रो रोब गमावै,

Bhachya, Tapsya Geet

Tap Ro Tyohar Manaoji,

(लय-ओ म्हांरा गुरुदेव)  तप रो त्योहार मनावोजी, नस-नस में जोश जगावोजी ॥ स्थायी ॥ जो तपरी ज्योत जलावै, वो अजर अमर बण ज्यावै । थे समता श्रोत बहावो जी, ओ तपस्या रो रंग…. 111 || जो लेवै तप रो शरणो, बह ज्यावै अमृत झरणो। निज घर में मौज उड़ावो जी, ओ तपस्या रो रंग….112 ||

Bhachya, Tapsya Geet

So So Sadhuvad Unhi Ko Tap Se Shakti Jagayi

(तर्ज. माईनी माई मुंडेर पे) आज हमारे मन आंगन में देखो खुशीया छायी , सौ सौ साधुवाद उन्हीं को तप से शक्ति जगाई 1 भिक्षु शासन की बगिया में तप का फूल खिला है, बडे भाग्य से ऐसा नन्दन वन गण हमें मिलाहै  इस उपवन की-2 ठंडी लहरे चले पवन पुरवाई , सौ-सौ– 2 तप

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